टाटा मोटर्स को लेकर ब्रोकरेज का बड़ा वार्निंग! ‘JLR’ के बढ़ते खर्च से शेयरों में 20% गिरावट का खतरा

Rashtrabaan

    टाटा मोटर्स के निवेशकों के लिए एक गंभीर खबर सामने आई है। कंपनी की सहायक इकाई जगुआर लैंड रोवर (JLR) के बढ़ते आंतरिक खर्च और भारी निवेश के कारण भविष्य में लाभप्रदता पर असर पड़ सकता है। इन तकनीकी परेशानियों को देखते हुए एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने टाटा मोटर्स के शेयरों में करीब 20 प्रतिशत तक गिरावट की संभावना जताई है, जिससे बाजार खुलते ही शेयरों पर दबाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी जेफरीज ने देश की प्रमुख और बड़ी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स पर सतर्क दृष्टिकोण अपनाते हुए कंपनी के लिए अपना ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग जारी रखा है और प्रति शेयर 300 रुपये का लक्ष्य मूल्य रखा है।

    ब्रोकरेज की लक्ष्य कीमत वर्तमान में 376 रुपये प्रति शेयर के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत की गिरावट संकेतित करती है। जगुआर लैंड रोवर (JLR) के सामने बढ़ती चुनौतियां, लागत में इजाफा, बदलती उत्पादन नीतियां और भारी निवेश की जरूरतें कंपनी के प्रदर्शन पर आगामी दिनों में दबाव डाल सकती हैं, ऐसा ब्रोकरेज का मानना है।

    JLR के व्यावसायिक माहौल को लेकर चिंता बढ़ी

    जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा मोटर्स पर सबसे बड़ा दबाव जगुआर लैंड रोवर से जुड़ी परिस्थितियों से पैदा हो रहा है। वित्त वर्ष 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में JLR ने खुद स्वीकार किया है कि उसे कठिन व्यावसायिक माहौल का सामना करना पड़ रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, लगातार बदलते नियामक कानून और चीन की वाहन कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा ने व्यवसाय को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

    ब्रोकरेज यह भी बताती है कि इलेक्ट्रिफिकेशन अभी भी JLR की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर कंपनी अपनी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन केंद्रित नीति में बदलाव कर रही है। अब JLR इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ आंतरिक दहन इंजन (ICE) और हाइब्रिड मॉडल पर भी ज्यादा ध्यान दे रही है। जेफरीज का मानना है कि यह बदलाव बाजार की वास्तविक मांग के अनुरूप रणनीति समायोजन दर्शाता है, हालांकि इससे भविष्य की वृद्धि को लेकर सवाल भी उठते हैं।

    वॉरंटी कॉस्ट 15 साल के उच्चतम स्तर पर

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में बिक्री के अनुपात में कंपनी के वॉरंटी खर्च 6.6 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे अधिक है। वॉरंटी खर्च में लगातार वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी अपने वाहनों की गुणवत्ता और बिक्री के बाद सेवा पर अधिक खर्च कर रही है। इस वजह से JLR के मुनाफे पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है, ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है।

    घटते डिप्रिशिएशन से बढ़ा मुनाफा

    वित्त वर्ष 2026 में घिसाऊँदर (डिप्रिशिएशन) 11 सालों के निचले स्तर पर पहुंच गया। जेफरीज के अनुसार, कंपनी की स्थायी संपत्तियों और अमूर्त परिसंपत्तियों पर डिप्रिशिएशन दरें दोनों ही इस अवधि में 15 सालों के न्यूनतम पर हैं। इससे कंपनी के संचालन लाभ में इजाफा हुआ है और लागत कम होने से कमाई बेहतर लग रही है।

    हालांकि, ब्रोकरेज का मानना है कि यह फायदा स्थायी नहीं होगा। जैसे-जैसे कंपनी के नए प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे और उनकी व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगी, डिप्रिशिएशन लागत बढ़ सकती है, जिसका नतीजा नफे पर दबाव के रूप में सामने आ सकता है।

    भारी निवेश ने बढ़ाई चिंताएं

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कंपनी ने अनुसंधान एवं विकास और पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में लगभग 10.6 अरब पाउंड का निवेश किया है। हालांकि, इस बड़े निवेश का एक बड़ा हिस्सा अभी भी निर्माण कार्य प्रगति (CWIP) और उत्पादन विकास में है। इसका मतलब यह है कि इन प्रोजेक्ट्स के पूर्ण वित्तीय परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं।

    जेफरीज के विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 में साइबर हमलों का प्रभाव देखा गया है, जबकि वित्त वर्ष 2027 और 2028 बेहतर हो सकते हैं। फिर भी, ब्रोकरेज का अनुमान है कि कंपनी की कमाई वित्त वर्ष 2025 के स्तर से नीचे रह सकती है।

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