तानाशाह सचिवों का क्यो नही हो रहा तबादला? वर्षो से जमे है एक ही स्थान पर

Rashtrabaan

बालाघाट, राष्ट्रबाण। जिले में पंचायत के कुछ जिम्मेंदार लगातार पंचायती राज व्यवस्था को बिगाड़ने का कार्य कर रहे है। जिसकी मुख्य वजह यह हो सकती है कि वे उस निर्धारित स्थान पर कार्य नही करना चाहते या फिर उनके खिलाफ कोई ठोस कार्यवाहीयां नही हो पाती। जिसका सीध दंश उस पंचायत क्षेत्र की आमजनता को भुगतना पड़ता है। हाल के दिनो में जिले के करीब एक सैकडा सचिवो का तबादला किया गया, लेकिन कुछ सचिव इस तबादले नीति की दायरे में आने से चूक गये है जो लंबे अरसे से एक ही स्थान पर पदस्थ है और वे तानाशाह हो चुकी है। आलम यह है कि लोग अब उनके कार्यकाल से उबकर उन्हे तत्काल हटाने की मांग कर रहे है।

दरअसल एक ऐसा ही शिकायती मामला ग्राम पंचायत उकवा से सामने आया है जहां पंचायत की महिला सरपंच सुश्री अनुसूईया क्षत्रिय अपनी उकवा पंचायत में पदस्थ सचिव दशरथ बिसेन को तत्काल हटाने की मांग कर रही है। उनका कहना है कि सचिव दशरथ बिसेन पिछले 01 वर्ष से पंचायत के कार्यों में कोई कोई रूचि नही ले रहे है और ना ही पंचायत के विकास कार्यों में सहयोग किया जा रहा है। जहां सचिव की वजह से पंचायत के कार्य प्रभावित हो रहे है और सरपंच को अपमानित होना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि ऐसे सचिव को तत्काल हटाया जायेग।

इसके अलावा खैरलांजी विकासखंड की ग्राम पंचायत टटेकसा (तुमसर) के ग्रामीण भी शिकायत लेकर आए थे कि उनकी पंचायत के सचिव शंकपाल घरडे पंचायत से अनुपस्थित रहते है, जिसके कारण ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए परेशान होना पड़ता है। सचिव से सम्पर्क करने पर वह गाली गलौच करता है और धमकी देता है कि जो बनती है कर लो! आरोप यह भी लगाया कि सचिव प्रायत: नशे की हालत में पंचायत आते है और पंचायत परिसर में व्यवस्था बिगाड़ देते है। उनके द्वारा पंचायत के कार्यों में अनियमितता भी की जा रही है। जहां टटेकसा के ग्रामीणो ने भी मांग की है कि सचिव को तत्काल निलंबित किया जाए और उनके कार्यों की जॉंच की जाए।

उक्त शिकायतो के अलावा कई पंचायतें ऐसी भी है कि जहां पदस्थ सचिव लंबे अरसे से जमे हुए है और उनका व्यवहार अपने ही दायित्व के प्रति तानाशाह हो चुका है। जिस पर उच्च अधिकारियों का कोई ध्यान नही है। शायद वे अधिकारियों के खास व्यक्ति बनकर पंचायत राज व्यवस्था को बिगाड़ने का तांडव मचाये हुए है। ऐसे सचिवो के खिलाफ होने वाली शिकायतो को गंभीरता से लेकर उनके विरूद्ध शिकायती तथ्यो के आधार पर कार्यवाही की जानी चाहियें।

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