फरीदाबाद, राष्ट्रबाण: हरियाणा के फरीदाबाद में एक हैरान करने वाली घटना ने माता-पिता और चिकित्सकों को चौंका दिया। तीन साल के प्रज्ञान और उनकी चार साल की बहन ने ऑनलाइन खरीदे गए खिलौनों के छोटे चुंबकों को निगल लिया, जिसके कारण उनकी आंतों में गंभीर क्षति पहुँची। दोनों बच्चों को बचाने के लिए डॉक्टरों ने 48 घंटों के भीतर दो जटिल सर्जरी कीं। इस घटना ने खिलौनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, और माता-पिता ने अन्य अभिभावकों को सावधान रहने की सलाह दी है।
चुंबकों से हुआ खतरा
प्रज्ञान को 12 अगस्त को तेज पेट दर्द और उल्टियों की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया। स्कैन से पता चला कि उसके पेट में 10 चुंबक आपस में चिपककर आंतों में आठ जगह छेद कर चुके थे। सबसे छोटी आंत, ड्यूडेनम, को भी नुकसान पहुँचा था। अगले दिन, उसकी बहन को भी इसी तरह की शिकायत हुई, और जाँच में उसके पेट में पाँच चुंबक मिले, जिन्होंने आंतों को नुकसान पहुँचाया था। माता-पिता ने बताया कि ये चुंबक एक प्रमुख खिलौना ब्रांड से ऑनलाइन खरीदे गए थे, जिन्हें वे सुरक्षित मानते थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया, क्योंकि वे अपने दोनों बच्चों को खोने के कगार पर थे।
जटिल सर्जरी और मेडिकल चुनौती
फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में दोनों बच्चों की सर्जरी की गई। प्रज्ञान की सर्जरी में डॉक्टरों ने आठ छेदों को ठीक किया और क्षतिग्रस्त आंतों का पुनर्निर्माण किया। उनकी बहन की सर्जरी भी उतनी ही जटिल थी, क्योंकि चुंबकों ने आंतों में गंभीर चोटें पैदा की थीं। डॉक्टरों ने बताया कि चुंबकों की आपसी आकर्षण शक्ति के कारण वे आंतों को चिपकाकर छेद कर देते हैं, जो जानलेवा हो सकता है। सर्जरी की सफलता के बाद दोनों बच्चे अब ठीक हो रहे हैं, लेकिन उनकी रिकवरी लंबी होगी।
माता-पिता की चेतावनी
बच्चों के माता-पिता ने इस घटना को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन खरीदे गए खिलौनों में छोटे चुंबक बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने अन्य माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों को ऐसे खिलौने देने से पहले उनकी जाँच करें। विशेषज्ञों ने भी सुझाव दिया कि माता-पिता बच्चों को छोटे चुंबक वाले खिलौनों से दूर रखें और निगलने की स्थिति में तुरंत अस्पताल जाएँ।
इस घटना ने खिलौनों की सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए हैं। प्रशासन ने ऑनलाइन बिकने वाले खिलौनों की जाँच के लिए कदम उठाने की बात कही है। साथ ही, माता-पिता और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बन रही है।
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