यूपी में बड़ा नौकरी घोटाला: एक नाम, 6 जिलों में नौकरी, 3 करोड़ की सैलरी!

Rahul Maurya

    लखनऊ, राष्ट्रबाण: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक हैरान करने वाला घोटाला सामने आया है। आगरा के शाहगंज का रहने वाला अर्पित सिंह नाम का शख्स 6 अलग-अलग जिलों में एक ही समय में नौकरी करता रहा और 9 साल में करीब 3 करोड़ रुपये की सैलरी ले गया। खास बात ये कि हर जिले में उसने एक ही नाम और पता इस्तेमाल किया, लेकिन आधार नंबर अलग-अलग दिए। अब इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    कैसे हुआ खुलासा?

    ये घोटाला तब पकड़ा गया, जब स्वास्थ्य विभाग ने अपने कर्मचारियों का डेटा मानव संपदा पोर्टल पर चेक किया। पता चला कि अर्पित सिंह नाम का एक व्यक्ति बलरामपुर, फर्रुखाबाद, रामपुर, बांदा, अमरोहा और शामली में एक साथ एक्स-रे टेक्नीशियन की नौकरी कर रहा था। हर जिले में उसका नाम, पिता का नाम (अनिल कुमार सिंह), और जन्मतिथि एक ही थी, लेकिन आधार नंबर अलग-अलग। इस गड़बड़ी ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

    अर्पित के पिता का बयान

    आरोपों के बाद अर्पित के पिता अनिल सिंह ने सफाई दी। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे की पहली नौकरी 2016 में हाथरस में लगी थी। उसने गाजियाबाद से डिप्लोमा किया था। मुझे इस फर्जीवाड़े की कोई जानकारी नहीं थी। अखबारों में खबर पढ़कर पता चला। हम चाहते हैं कि इसकी निष्पक्ष जांच हो।”

    अलग-अलग जिलों में अलग आधार

    • अमरोहा: अर्पित ने खुद को मैनपुरी का निवासी बताया और आधार नंबर 339807337433 दिया।
    • शामली: आगरा का पता दिया, लेकिन आधार नंबर गलत पाया गया।
    • बलरामपुर: आधार नंबर 525449162718 के साथ शाहगंज, आगरा का निवासी बताया।
    • फर्रुखाबाद: आधार नंबर 500807799459 इस्तेमाल किया।
    • रामपुर: आधार नंबर 8970277715487 दिया।
    • बांदा: आधार नंबर 496822158342 के आधार पर नौकरी की।

    कितना हुआ नुकसान?

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्पित हर जिले से हर महीने करीब 65,595 रुपये की सैलरी ले रहा था। एक जिले से 9 साल में उसने 75 लाख रुपये से ज्यादा कमाए। छह जिलों को मिलाकर ये रकम 3 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

    पुलिस ने बलरामपुर, फर्रुखाबाद, रामपुर, बांदा, अमरोहा, और शामली में अर्पित के खिलाफ केस दर्ज किए हैं। जांच में ये पता लगाया जा रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर ये फर्जीवाड़ा कैसे हुआ। ये मामला सरकारी भर्ती प्रक्रिया और आधार सत्यापन की खामियों को उजागर करता है। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर 9 साल तक ये धोखा कैसे चलता रहा?

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