सिवनी, राष्ट्रबाण। पुलिस से बदसलूकी और शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में बुधवार को दो बड़ी कार्रवाई सामने आईं। एक ओर जहां पुलिस ने फरार चल रहे ब्रजेश राजपूत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, वहीं दूसरी ओर दबाव में आकर आरोपी कुलदीप ठाकुर ने स्वयं न्यायालय में सरेंडर कर दिया। यह मामला धीरे-धीरे सिवनी जिले के पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद से निकलकर एक जटिल जांच का रूप ले चुका है, जिसमें कई नए खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मारबोड़ी से गिरफ्तार किए गए ब्रजेश राजपूत को बुधवार को सिवनी पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने सुनवाई के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। ब्रजेश पर आरोप है कि उसने बालाघाट पुलिस टीम के साथ बदसलूकी की थी और उनके सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के दौरान उसने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की थी और टीम के काम में दखल देने की कोशिश की थी।
दबाव में आकर कुलदीप ठाकुर ने किया सरेंडर
वहीं, फरार आरोपी कुलदीप ठाकुर ने पुलिस की लगातार दबिश और बढ़ते दबाव के चलते अंततः न्यायालय में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया। पुलिस ने कुलदीप से पूछताछ के लिए न्यायालय से एक दिन की रिमांड मांगी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। कुलदीप से पूछताछ में पुलिस को अन्य फरार आरोपियों के ठिकानों और पूरी साजिश की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रिमांड अवधि में कुलदीप से यह भी पूछा जा रहा है कि घटना के दौरान किन लोगों की क्या भूमिका थी और फरार आरोपी कहां छिपे हो सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि अगर पूछताछ में अहम जानकारी नहीं मिलती है, तो पुलिस उसकी रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग न्यायालय से कर सकती है।
अब भी फरार है प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत
इस पूरे विवाद की जड़ 55 लाख रुपये की चोरी के मामले से जुड़ी है, जिसने बालाघाट पुलिस को सिवनी तक पहुंचा दिया था। चोरी के इस केस की जांच के दौरान पुलिस टीम सिवनी में पदस्थ प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत के घर पहुंची थी। बताया जा रहा है कि उसी समय पुलिसकर्मियों और योगेश राजपूत के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते-देखते बदसलूकी और हाथापाई तक पहुंच गई।
घटना के बाद माहौल इतना बिगड़ा कि मामला थाना कोतवाली पहुँच गया और वहां एएसपी दीपक मिश्रा के हस्तक्षेप के बाद बालाघाट पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। उसके बाद योगेश राजपूत एक पत्र लिखकर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। उस पत्र में योगेश ने डीआईजी राकेश सिंह और शराब ठेकेदार संजय भारद्वाज पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। फिलहाल योगेश राजपूत और उसका साथी नरेंद्र दोनों फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस की कार्रवाई तेज, जांच के घेरे में कई नाम
पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने में जुटी हुई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने कई संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी की है और कुछ लोगों से अनौपचारिक पूछताछ भी की है। माना जा रहा है कि यह मामला केवल बदसलूकी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े नेटवर्क या छिपे हुए आर्थिक लेन-देन की भी कड़ी जुड़ी हो सकती है। साथ ही यह भी चर्चा हो रही है की सिवनी नगर में इनके द्वारा खाकी के संरक्षण में जुआ फड़ जमाई जाती थी। यह जुआ फड़ बिना किसी भय के खिलाया जाता था तो पुलिस के नाम पर तीस हजार रुपये रोजाना देने की बात भी सुर्खिया बनी हुई है।
सवाल अब भी बरकरार
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत कहां है? क्या वह खुद सामने आएगा या पुलिस की गिरफ्त में आएगा? 55 लाख की चोरी से शुरू हुआ यह पूरा घटनाक्रम अब कई परतों में उलझ चुका है। बालाघाट और सिवनी दोनों जिलों की पुलिस की कार्रवाई ने संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाइयाँ देखने को मिल सकती हैं।
फिलहाल, कुलदीप ठाकुर की रिमांड और पूछताछ से क्या नए राज खुलेंगे, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं जनता के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि क्या इस विवाद का अंत किसी सच्चाई के उजागर होने पर होगा या यह रहस्य यूं ही गहराता चला जाएगा।
Read Also : MP News : कोतवाल किशोर वामनकर और प्रधान आरक्षक शेखर बघेल बदले स्थान

