अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने हॉर्मुज जलसन्धि में सैकड़ों जहाजों के लिए एक निकासी योजना तैयार की है। यह योजना सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तब लागू की जाएगी जब क्षेत्र में तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत दिखाई देंगे। इस बारे में जानकारी देते हुए IMO के सचिवालय के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने सिंगापुर मरीन वीकेप के दौरान कहा कि योजना का उद्देश्य समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाना और बहुतायत जहाजों के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।
डोमिंग्वेज ने स्पष्ट किया कि इस योजना को तभी लागू किया जाएगा जब हॉर्मुज जलसन्धि और आसपास के क्षेत्र में स्थिति में स्थिरता आएगी और संकट कम होगा। उन्होंने कहा, “हम इस योजना को केवल तब सक्रिय करेंगे, जब हम यह सुनिश्चित कर सकें कि क्षेत्र में स्थिति स्थिर है और सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए सहमत हैं।”
हॉर्मुज जलसन्धि विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों टन तेल और अन्य कार्गो जहाजों द्वारा परिवहन किया जाता है। हाल के वर्षों में, इस क्षेत्र में सुरक्षा की चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। IMO की यह पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक समुद्री समुदाय क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों की तलाश में है।
सिंगापुर मरीन वीकेप के दौरान अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी इस योजना की प्रशंसा की और कहा कि यह क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए एक प्रभावी कदम हो सकता है। वे सभी मानते हैं कि समुद्री सुरक्षा में सुधार से न केवल समुद्री यातायात सुचारु होगा, बल्कि क्षेत्र में व्यापारिक लेन-देन में भी सुधार होगा।
IMO की निकासी योजना में शामिल प्रमुख बिंदुओं में जहाजों के मार्गों का पुनर्निर्धारण, आपातकालीन संचार प्रोटोकॉल का सृजन और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करना शामिल है। इसके साथ ही, इस योजना के अंतर्गत विभिन्न देशों के समुद्री सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
आगे डोमिंग्वेज ने कहा कि IMO लगातार क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखे हुए है और आवश्यकतानुसार योजना में संशोधन भी करेगा। उन्होंने सभी संबद्ध पक्षों से शांति बनाए रखने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने की अपील की, ताकि समुद्री यातायात को सुरक्षित और सुचारु बनाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों एवं समुद्री समुदाय के लिए यह योजना एक सकारात्मक संकेत है कि समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, यह योजना क्षेत्र के आर्थिक और व्यापारिक हितों की रक्षा करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

