महाराष्ट्र सरकार ने CBG नीति 2026 को मंजूरी दी, कचरा से ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने का बड़ा कदम
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कचरा से बायोगैस (Compressed Bio-Gas – CBG) उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए CBG नीति 2026 को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण में योगदान करना है। इसके तहत 500 करोड़ रुपए की राशि वित्त वर्ष 2026–27 के लिए आवंटित की गई है, जो प्रोजेक्ट डेवलपर्स को विभिन्न मॉडल जैसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के माध्यम से सहायता प्रदान करेगी।
इस नई नीति से राज्य में कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि CBG उत्पादन से न केवल स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत विकसित होगा, बल्कि जैविक कचरे का भी उचित उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे प्रदूषण स्तर में कमी आएगी।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर पर्यावरण अनुकूल प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाएंगे, जो वित्तीय और तकनीकी दोनों ओर से सहयोग प्रदान करेंगे। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के अंतर्गत निवेशकों को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी, जिससे परियोजनाओं का विस्तार और टिकाऊ विकास संभव होगा।
महाराष्ट्र के उद्योग और ऊर्जा मंत्री ने इस नीति को लेकर कहा कि प्रदेश को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर करने के लिए यह महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि 500 करोड़ के फंड का सही इस्तेमाल राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि CBG नीति महाराष्ट्र को देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी और अन्य राज्यों के लिए मॉडल का काम करेगी। वे कहते हैं कि इस तरह की पहल से न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा।
सरकार ने घोषणा की है कि नीति के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी और जरूरत के अनुसार आवश्यक संशोधन किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक परियोजनाएं सफल हो सकें। जनता और उद्योग जगत से सहभागिता एवं सुझाव लेने के लिए भी योजना बनाई जा रही है।
इस प्रकार CBG नीति 2026 महाराष्ट्र में पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

