श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज बने जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष

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    हरिद्वार। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर, गाजियाबाद के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज को जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति महागौरवपूर्ण समारोह के माध्यम से महाराष्ट्र के माहुगढ़ नांदेड़ स्थित श्री दत्त शिखर संस्थान में की गई, जहां अखाड़ा परिषद के वरिष्ठ संत और पदाधिकारी उपस्थित थे।

    इस अवसर पर जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज को अध्यक्ष बनने की घोषणा की, जिसके पश्चात जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने भी उनका अभिनंदन किया।

    कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत मोहन भारती महाराज, वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत उमाशंकर भारती महाराज, मंत्री ओम भारती महाराज, श्रीमहंत शिवानंद सरस्वती महाराज के साथ-साथ श्री दत्त शिखर संस्थान के महंत डॉ. धनेश्वर उर्फ योगी शाम भारती महाराज आदि कई देश-विदेश से आए संतजनों ने उनकी इस महत्वपूर्ण पदस्थापना पर बधाई दी। नागपुर से सूर्यनंद गिरि महाराज और महाराष्ट्र के कृष्णकांत गोस्वामी सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाराज का भव्य स्वागत किया।

    दिल्ली हवाई अड्डे पर भी दिल्ली संत महामंडल के सभी प्रमुख संतों ने श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज का स्वागत एवं अभिनंदन किया। दिल्ली संत महामंडल के संगठन मंत्री व जूना अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत कंचन गिरि महाराज, कोषाध्यक्ष महंत धीरेंद्र पुरी महाराज, गाजियाबाद के देवी मंदिर के महंत श्रीमहंत गिरिशानंद गिरि, महंत अतुल गिरि महाराज, नमन गिरि महाराज एवं कोतवाल मंगलदास महाराज समेत कई संतों ने उनकी गरिमामयी उपस्थिति का उत्सव मनाया।

    अपने अध्यक्ष पद ग्रहण के उपरांत श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि यह उपलब्धि भगवान दूधेश्वर की कृपा और आशीर्वाद की वजह से संभव हुई है। उनका संदेश था कि सनातन धर्म की सेवा करना और इसे सशक्त बनाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने सभी धर्मों और संप्रदायों के बीच एकता स्थापित कर सनातन धर्म को विश्वभर में पुनः सम्मान-सम्मान दिलाने का संकल्प व्यक्त किया। महाराज ने कहा कि वे देश और धर्म की सेवा में कटिबद्ध हैं और अपनी पूरी शक्ति से सनातन धर्म का परचम विश्व में ऊँचा करने का कार्य करेंगे।

    यह ऐतिहासिक नियुक्ति जूना अखाड़ा की मान्यताओं और परंपराओं को दृढ़ता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिससे पूरे सनातन समाज में उत्साह और उमंग का वातावरण बना है।

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