त्रिनामूल कांग्रेस के युवा नेताओं के समक्ष आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव में चुनौती बेहद कठिन होती जा रही है। पार्टी के प्रमुख नेताओं के संतान जिन्हें अक्सर ‘नेपो बेबीज़’ के रूप में जाना जाता है, उन्हें विरोधी दलों से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। इस कड़ी राजनीतिक लड़ाई में प्रमुख हैं श्रेया पांडे, सर्सन्या बनर्जी और तीर्थंकर घोष।
श्रेया पांडे, जो कि पूर्व मंत्री सदन पांडे की पुत्री हैं और माणिकतला क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं, अपने प्रभावित क्षेत्र में जनसमर्थन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। श्रेया ने सामाजिक कार्यों के माध्यम से अपनी छवि मजबूत की है, लेकिन राजनीतिक विरोधी उन्हें केवल ‘नेपो बेबी’ के तौर पर ही दिखाने की रणनीति अपनाए हुए हैं।
वहीं, सर्सन्या बनर्जी, जो सांसद कल्याण बनर्जी के पुत्र हैं और उत्तरपारा की राजनीति में उभरते हुए चेहरा बने हैं, उनके लिए चुनौती भी कम नहीं है। विपक्षी पार्टियों ने यहां अपनी ताकत बढ़ा रखी है, जिससे चुनावी मुकाबला साल-ब-साल और कड़ा होता जा रहा है।
तीर्थंकर घोष, जो मुख्य व्हिप निर्मल घोष के पुत्र हैं और पानीहाटी से ताल्लुक रखते हैं, अपनी पार्टी के लिए नई उम्मीदों के साथ मैदान में हैं। मगर यहां भी उन्हें स्थानीय मुद्दों के अलावा अपनी पृष्ठभूमि को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
इन तीनों युवा नेताओं के लिए भविष्य की राजनीति में अपनी जगह पक्की करने का दांव है और इसलिए वे जनता के बीच उतरकर उनके विश्वास और समर्थन को जितने के लिए जी-जान से जुटे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी इन ‘नेपो बेबीज़’ को चुनौती देने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे, जिससे 2026 का विधानसभा चुनाव काफी प्रतिस्पर्धात्मक बन गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने इन युवाओं के माध्यम से युवा वोटरों को आकृष्ट करने की योजना बनाई है, लेकिन ‘नेपोटिज्म’ को लेकर छाई आलोचनाएं उनके सामने बड़ी बाधा हैं। आगामी चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि त्रिनामूल कांग्रेस किस तरह से अपने युवा नेताओं को स्थापित कर पाती है और जनता इनको किस नजर से देखती है।

