अश्विता में थुकलाल और तागड़ा की माइमेसिस: डेटा, स्मृति और डिजिटल स्वरूपों की खोज

Rashtrabaan

    मिलापोर के ओज़ोन प्रीमिया में अश्विता की नई प्रमुख गैलरी में 17 जुलाई तक प्रदर्शित ‘माइमेसिस’ थुकलाल और तागड़ा की एक अनूठी प्रस्तुति है, जो उनके लंबे समय से चल रहे आर्बोरियम प्रोजेक्ट का विस्तार है। यह परियोजना तकनीकी और डिजिटल परिदृश्यों के माध्यम से हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी को आकार देने वाले एल्गोरिदम, पिक्सल और डिजिटल इकोसिस्टम के पहलुओं की गहराई से पड़ताल करती है।

    इस प्रदर्शनी में कलाकारों ने डिजिटल युग की जटिलताओं और तकनीक के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को उजागर किया है। माइमेसिस में, थुकलाल और तागड़ा ने डेटा और स्मृति के बीच के संबंध को पुनः परिभाषित किया है, जिससे दर्शकों को यह समझने में मदद मिलती है कि कैसे डिजिटल माध्यमों में हमारे डिजिटल स्वरूप समय के साथ विकसित हो रहे हैं।

    प्रदर्शनी की क्यूरेशन इस प्रकार की गई है कि यह तकनीकी विकास और मानव अनुभव के बीच के संतुलन को मजबूती से प्रस्तुत करती है। एल्गोरिदमिक निर्णयों की पारदर्शिता और पिक्सल आधारित इमेजरी, जिन्हें आज हम अपनी दैनिक ज़िन्दगी का हिस्सा मानते हैं, उनकी जटिलताओं को कलाकारों ने बारीकी से दर्शाया है।

    माइमेसिस प्रदर्शन हमारी आधुनिक संस्कृति की छाया में डिजिटल स्मृति और पहचान पर सवाल उठाता है और दिखाता है कि कैसे टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव से हमारी व्यक्तिगत और सामाजिक वास्तविकता प्रभावित हो रही है। यह आश्वस्त करता है कि डिजिटल जीवन और वास्तविक जीवन के बीच की सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं।

    अश्विता की इस पहल से कला प्रेमियों और तकनीकी अंतर्दृष्टि रखने वालों दोनों को एक समृद्ध अनुभव मिलता है, जो वर्तमान डिजिटल युग की चुनौतियों और संभावनाओं को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान करता है। यह प्रदर्शनी कलाकारों की दृष्टि और तकनीकी अवयवों के सम्मिश्रण से एक प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत करती है, जो निश्चित रूप से दर्शकों के मन में गहरा प्रभाव छोड़ती है।

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