धान खरीदी में पोर्टल बंदी का संकट: छह हजार किसान बेहाल, 24 घंटे का अल्टीमेटम, बरघाट तहसील घेराव की चेतावनी

मध्यप्रदेश में एक बार फिर सरकारी व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है। धान उपार्जन के लिए 13 जनवरी तक खुला रहने वाला स्लॉट बुकिंग पोर्टल अचानक 8 जनवरी को ही बंद कर दिया गया, जिससे जिले के करीब छह हजार धान उत्पादक किसान अपनी फसल बेचने से वंचित रह गए। प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर मंत्री तक गुहार लगाने के बावजूद जब समाधान नहीं मिला, तो किसानों का सब्र जवाब देने लगा है। अब किसानों ने साफ चेतावनी दी है, अगर 24 घंटे में पोर्टल नहीं खुला, तो बरघाट तहसील कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

Rashtrabaan

    सिवनी, राष्ट्रबाण। धान उत्पादक किसानों के लिए यह खरीफ सीजन उम्मीदों के बजाय संकट लेकर आया है। शासन द्वारा घोषित तिथि के अनुसार धान खरीदी का स्लॉट पोर्टल 13 जनवरी तक खुला रहना था, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के 8 जनवरी को ही पोर्टल बंद कर दिया गया। इस अचानक फैसले ने जिले के लगभग छह हजार किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है, जिनकी धान मंडियों और घरों में रखी हुई है, लेकिन स्लॉट न मिलने के कारण खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रही।

    किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर पंजीयन कराया था और पोर्टल खुलने की तय तिथि तक स्लॉट मिलने की उम्मीद में इंतजार करते रहे। लेकिन जब पोर्टल अचानक बंद हुआ, तब तक हजारों किसान स्लॉट बुक ही नहीं कर पाए। नतीजा यह हुआ कि महीनों की मेहनत, लागत और कर्ज पर उगाई गई फसल अब किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए किसानों ने सबसे पहले विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया। कृषि विभाग, सहकारिता विभाग और उपार्जन से जुड़े अधिकारियों के चक्कर काटे गए, लेकिन हर जगह सिर्फ आश्वासन ही मिला। इसके बाद किसानों ने जिला कलेक्टर के समक्ष अपनी समस्या रखी, मगर वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक तंत्र उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है और जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाली जा रही है।

    जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तब मजबूर होकर किसान सिवनी में गणतंत्र दिवस समारोह शामिल हुए प्रदेश के राजस्व एवं जिले के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा से मिले। किसानों ने उन्हें अपनी पूरी समस्या बताते हुए एक ज्ञापन सौंपा और मांग की कि स्लॉट बुकिंग पोर्टल को तत्काल दोबारा खोला जाए, ताकि वे अपनी धान शासन को बेच सकें। मंत्री ने किसानों को आश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक कोई आदेश या कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    किसानों का कहना है कि धान लंबे समय तक रखे रहने से नमी और गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ रहा है। अगर फसल खराब हुई तो उसकी भरपाई कौन करेगा? पहले ही खाद, बीज, डीजल और मजदूरी की बढ़ती लागत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ऊपर से खरीदी में यह अव्यवस्था किसानों को कर्ज के दलदल में धकेल रही है।

    ग्रामीण इलाकों में इस मुद्दे को लेकर किसानो में भारी आक्रोश है। किसानो का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि किसानों के साथ सीधा अन्याय है। अगर शासन ने तारीख तय की थी तो उससे पहले पोर्टल बंद करना पूरी तरह गलत है। इससे यह संदेश जाता है कि किसान की मेहनत और उसकी उपज की कोई कीमत नहीं है।

    अब किसानों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने साफ ऐलान किया है कि अगर 24 घंटे के भीतर स्लॉट बुकिंग पोर्टल नहीं खोला गया, तो वे बरघाट तहसील कार्यालय के सामने धरना देंगे। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने की संभावना है, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

    धान उत्पादक किसानों की यह समस्या न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि सरकार की किसान हितैषी नीतियों पर भी सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि क्या अन्नदाता को उसकी उपज बेचने के लिए भी सड़कों पर उतरना पड़ेगा? अब किसानो की निगाहें शासन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो किसानो का बड़ा उग्र आंदोलन देखने को मिल सकता है।

    Read Also : खैरलांजी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अवैध रेत परिवहन करते ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त, 4 लाख से अधिक की संपत्ति जप्त

    error: Content is protected !!