बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने मेकेदातु परियोजना को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए कर्नाटक इंजीनियरिंग रिसर्च स्टेशन (KERS) के निदेशक के नेतृत्व में एक तकनीकी टीम बनाई है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द इस परियोजना के लिए आवश्यक सभी आवश्यकताएं पूरी की जाएं और डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपा जाए।
मेकेदातु परियोजना, जो कावरी नदी पर आधारित है, कर्नाटक के लिए जल सुरक्षा और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इस परियोजना के तहत बैंगलोर तथा उसके आसपास के क्षेत्रों को पीने के पानी की समस्या से निजात दिलाना है। परियोजना की मंजूरी और उसकी तकनीकी सटीकता को लेकर कई वर्षों से विवाद चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना के संबंध में समीक्षा के आदेश दिए थे, जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की।
डी. के. शिवकुमार, कर्नाटक के सिंचाई मंत्री, ने कहा कि तकनीकी टीम ने परियोजना के सभी पहलुओं को गहराई से जांचना शुरू कर दिया है और दस दिनों के अंदर डीपीआर केंद्र सरकार को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह परियोजना कर्नाटक के जल प्रबंधन और कृषि विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार से समर्थन की भी अपेक्षा जताई।
परियोजना में जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण की सावधानियों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। तकनीकी टीम के विशेषज्ञ विभिन्न तकनीकी, पर्यावरणीय और कानूनी पहलुओं का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि परियोजना को बाधाओं से मुक्त किया जा सके और समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण किया जा सके।
मेकेदातु परियोजना को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मतभेद भी हैं, लेकिन कर्नाटक सरकार ने इसे प्रदेश की विकास प्राथमिकता बताया है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना न केवल जल संकट को कम करेगी बल्कि क्षेत्र के कृषि उत्पादकता को भी बढ़ावा देगी, जिससे किसानों और स्थानीय जनता को लंबे समय तक लाभ होगा।
कर्नाटक सरकार की यह पहल राज्य की जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले दिनों में इस परियोजना की प्रगति और इससे जुड़ी रिपोर्टों पर सभी की निगाहें रहेंगी।

