राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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    जयपुर। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने छात्रों को संबोधित करते हुए स्वर्णिम भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने इस अवसर पर शिक्षा की महत्ता और उसकी सार्थकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि उपाधियाँ तभी मूल्यवान होती हैं जब उनका उपयोग राष्ट्रहित में किया जाए।

    समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने इस पहल को देश के डिजिटल इंडिया अभियान का अभिन्न हिस्सा बताया और केंद्र एवं राज्य सरकारों के इस प्रयास को प्रशंसनीय करार दिया।

    राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन में नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने प्राचीन गुरुकुल प्रणाली का उल्लेख करते हुए समझाया कि कैसे समावेशन के संस्कार को आज के दीक्षांत समारोह में जीवित रखा गया है। इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू की गई मैकाले शिक्षा पद्धति की आलोचना करते हुए यह बताया कि इसने भारतीय युवाओं को उनके इतिहास और संस्कृति से दूर कर दिया। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 को ऐसे दृष्टिकोण से जोड़ा जो भारत को उसके गौरवशाली इतिहास से पुनः जोड़ता है।

    इसके अतिरिक्त अपने संबोधन में राज्यपाल ने भारत की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने शून्य की खोज, भास्कराचार्य के खगोल विज्ञान के योगदान, और बप्पा रावल की वीरता जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए भारतीय विरासत पर गर्व जताया। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले देश में आठ लाख गुरुकुल थे, जिन्हें अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया था। इससे भारतीय शिक्षा प्रणाली को भारी क्षति पहुंची और अंग्रेजों ने एक ऐसी मानसिकता विकसित की जो गुलामी को मंजूर कर सके।

    श्री बागडे ने युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह भी दी और कहा कि पड़ोसी देश इस माध्यम से भारत के युवाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह व्यक्ति को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी कमजोर कर देता है।

    催तंत्र की ओर से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने भी समारोह में विशेष रूप से कहा कि राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को एम्स जैसी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ ही मुख्यमंत्री आरोग्य आयुष्मान योजना को देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की जानकारी दी।

    समारोह में न केवल राज्य के ही बल्कि देश के सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. विकास महात्मे ने भी दीक्षांत व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया। कुलगुरु प्रो. प्रमोद येवले ने विश्वविद्यालय में हो रहे नवाचारों और शैक्षिक उन्नयन की जानकारी दी।

    इस भव्य समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को डिग्रियाँ और पदक भी प्रदान किए। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए न केवल नई शुरुआत का प्रतीक बना बल्कि शिक्षा, कौशल, और राष्ट्र निर्माण के समन्वय का एक सशक्त संदेश भी विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत किया।

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