जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे ने मध्यप्रदेश के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस भयानक हादसे में अब तक 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है जबकि 9 पीड़ितों के शव बरामद हो चुके हैं। इसके बावजूद 4 लोग अब भी लापता हैं, जिसके लिए लगातार बचाव एवं खोज अभियान जारी है। इस दुखद घटना ने प्रदेश सरकार को कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस दौरान स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों को इस हादसे में लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है, उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तीन कर्मचारियों – क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर इंचार्ज बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
इसके साथ ही होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को ड्यूटी में लापरवाही के कारण सस्पेंड कर दिया गया है और रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय भेजकर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
हाई-लेवल जांच कमेटी का गठन
सीएम ने यह भी बताया कि इस दुर्घटना की पूरी पड़ताल के लिए एक हाई-लेवल जांच कमेटी गठित की गई है, जो विस्तृत और निष्पक्ष जांच करेगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी जिम्मेदारों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की व्यवस्था की जा सके। इसके साथ ही क्रूज संचालन के लिए नए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) भी बनाए जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करते हुए उनकी हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री ने जबलपुर जाकर पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की और उनके दुःख में बराबर का सहभागी बनने का वादा किया। उन्होंने कहा कि इस असहनीय क्षति को कोई भी भर नहीं सकता, लेकिन सरकार हर संभव मदद करेगी ताकि वे इस कठिन समय में अकेले महसूस न करें।
रेस्क्यू टीमों की सराहना
इस हादसे में एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ और सेना के डाइवर्स ने बहादुरी का परिचय देते हुए कई जानें बचाई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन बहादुर कर्मियों को सार्वजनिक तौर पर सम्मानित किया जाएगा, जो इस त्रासदी के दौरान मानवता की सेवा में लगे रहे। घटना ने प्रदेश को एकजुट कर दिया है और सभी की जिम्मेदारी बनती है कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।

