तमिलनाडु में तमिल थाई वाझ्थु को तीसरे गीत के रूप में प्रस्तुत करने को लेकर सरकार ने स्पष्ट विरोध जताया है। टी.वी.के. सरकार के नेतृत्व में, यह निर्णय लिया गया है कि इस परंपरा को बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्री आधव अर्जुन ने इस संबंध में बयान देते हुए कहा कि तमिल थाई वाझ्थु की गरिमा और महत्व को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है, और यह गीत समारोह की शुरुआत में गाया जाएगा जबकि राष्ट्रीय गीत अंतिम में ही प्रस्तुत होगा।
तमिल थाई वाझ्थु, जो तमिल संस्कृति और मातृभूमि के प्रति सम्मान का प्रतीक है, को लेकर तमिलनाडु की जनता तथा सरकार गहरी प्रतिबद्धता दिखाती है। इसके स्थान को बदलने का प्रयास कई विरोधाभास और विवाद उत्पन्न कर सकता है, इसलिए आधव अर्जुन ने इसे पूरी मजबूती से अस्वीकार किया है। उनका मानना है कि सभी कार्यक्रमों और सरकारी समारोहों में इस गीत का महत्व सर्वोपरि रहना चाहिए ताकि तमिल पहचान और सम्मान को पूरा सम्मान मिल सके।
सरकार के इस फैसले का राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर व्यापक स्वागत हुआ है। तमिलनाडु के नागरिक इस परंपरा को लेकर विशेष भावुक हैं और इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा मानते हैं। मंत्री ने कहा कि वे तमिल भाषा और संस्कृति की रक्षा और संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत रहेंगे।
इसके अतिरिक्त, मंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गान की स्थानिता और इसे अंतिम में गाने की परंपरा भी जारी रहेगी। यह एक ऐसा क्रम है जो सभी नागरिकों के लिए सम्मान और गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसे किसी भी बदलाव के खिलाफ है जो परंपरागत स्वरूप को प्रभावित कर सकता है या सांस्कृतिक भावना को क्षीण कर सकता है।
इस विषय पर स्थानीय और राज्य स्तर के कई संगठनों ने भी मंत्रियों के इस रुख का समर्थन किया है। उनका मानना है कि तमिल थाई वाझ्थु का सही स्थान निश्चित करना तमिल संस्कृति की रक्षा और उसके भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार, तमिलनाडु सरकार की यह नीति तमिल पहचान को मजबूत करने और तमिल भाषा के प्रति सम्मान बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

