मध्य प्रदेश में जंगली भैंस के पुनर्स्थापन की नई योजना शुरू

Rashtrabaan

    भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर जंगली भैंसों को लौटाने के लिए विशेष प्रयास शुरू किए गए हैं। पिछले दशक में चीता पुनर्स्थापन अभियान की सफलता के बाद अब वन्यजीवन संरक्षण में नया अध्याय जुड़ने वाला है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में जंगली भैंस की प्रजाति करीब एक सदी पहले विलुप्त हो चुकी थी, लेकिन बालाघाट जिले के सूपखार एवं टोपला क्षेत्रों में अब जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन की तैयारी जोरों पर है।

    इस योजना के अंतर्गत असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व लाया जा रहा है। वर्तमान में पहला दल जिसमें चार जंगली भैंस—तीन मादा और एक नर शामिल हैं—अपना सफर प्रारंभ कर चुका है। परियोजना का लक्ष्य 50 जंगली भैंसों का एक मजबूत समूह बनाना है, जिसे ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में माना जाएगा। इस मौसमी अभियान में इस वर्ष आठ भैंसों को स्थानांतरित किया जाना है।

    परियोजना की पूरी प्रक्रिया काजीरंगा और कान्हा के वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारियों एवं अनुभवी पशु चिकित्सकों की निगरानी में वैज्ञानिक विधियों के अनुरूप चलाई जा रही है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और असम के बीच वन्यजीवों का वैकल्पिक आदान-प्रदान भी स्थापित किया जा रहा है, जिसमें असम से दो जोड़ों में गैंडे भी भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में लाए जाएंगे। अपनी ओर से मध्य प्रदेश असम को तीन बाघ और छह मगरमच्छ सौंपेगा।

    यह वन्यजीव संरक्षण संबंधी सहमति गुवाहाटी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा के बीच हुई बैठक में हुई थी। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि जंगली भैंस के पुनर्स्थापन से प्रदेश की जैविक विविधता को एक नया मजबूती मिलेगी और यह कदम पारिस्थितिकी तंत्र के सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

    मध्य प्रदेश पहले ही ‘‘टाइगर स्टेट’’ और ‘‘लेपर्ड स्टेट’’ के रूप में पहचाना जाता है। जंगली भैंसों का पुनर्स्थापन इस गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा तथा वन्यजीवन संरक्षण के प्रयासों में सफल कहानी जोड़ने वाला साबित होगा। वन विभाग और सरकार द्वारा इस परियोजना को लेकर सभी आवश्यक संसाधनों एवं संरक्षण उपायों का प्रावधान सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि प्राकृतिक आवास में जंगली भैंसों की संख्या सुरक्षित और निरंतर बढ़ती रहे।

    यह पहल न केवल मध्य प्रदेश के पौधों और जानवरों के आवास की बहाली करेगी, बल्कि स्थानीय अबादी के लिए रोजगार और इको टूरिज्म के अवसर भी उत्पन्न करेगी। उम्मीद की जा रही है कि इस प्रयास से वन्य जीव संरक्षण को एक नई उड़ान मिल सकेगी और भविष्य में अन्य विलुप्त प्रजातियों के पुनर्स्थापन के लिए भी मार्ग प्रशस्त होगा।

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