बालाघाट, राष्ट्रबाण संवाददाता। बालाघाट जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत उकवा में मंगलवार, 13 नवंबर को जबलपुर लोकायुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पंचायत सचिव योगेश हिरवाने को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब सचिव शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम वसूलने की कोशिश कर रहा था।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने पूरे परसवाड़ा जनपद और उकवा क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। बताया जा रहा है कि सचिव ने एक आम नागरिक से केवल उसकी वैध जमीन पर भवन निर्माण की अनुमति (NOC) देने के एवज में घूस मांगी थी।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता अंकुश चौकसे को शासन द्वारा आबादी भूमि में 1 डिसमिल का पट्टा आवंटित किया गया था। इस जमीन पर वे अपना मकान निर्माण करना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने ग्राम पंचायत से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के लिए आवेदन किया। लेकिन जब वे आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने पंचायत पहुंचे, तो सचिव योगेश हिरवाने ने सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के बदले 50 हजार रुपए की रिश्वत की मांग कर डाली।
शुरुआत में चौकसे ने इस बात को नज़रअंदाज़ किया, पर जब सचिव ने बार-बार पैसों की मांग की और काम रोका रखा, तो उन्होंने लोकायुक्त जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की सत्यता जांचने के बाद लोकायुक्त की टीम ने सचिव को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। 13 नवंबर की सुबह लोकायुक्त की टीम उकवा पहुंची और पूरी रणनीति के साथ जाल बिछाया गया।
जैसे ही सचिव योगेश हिरवाने ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपए नकद लिए, लोकायुक्त टीम ने मौके पर ही दबिश देकर उसे पकड़ लिया। पैसों की गिनती और रासायनिक परीक्षण के बाद पुष्टि हुई कि उसने रिश्वत ली है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सचिव को अग्रिम कार्यवाही के लिए बैहर ले जाया गया, जहां उससे पूछताछ जारी है।
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