रतलाम, राष्ट्रबाण। रतलाम पुलिस को अंतरराज्यीय साइबर गिरोह पकड़ने में बड़ी सफलता मिली है। दिनांक 15 नवंबर 2025 को रतलाम निवासी एक फरियादी के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए फरियादी को गंभीर आपराधिक प्रकरण में फँसाने का भय दिखाया। आरोपी ने दावा किया कि फरियादी के नाम से जारी सिम कार्ड का उपयोग एक बड़े वित्तीय अपराध में किया गया है तथा मुंबई स्थित केनरा बैंक के एक खाते में लगभग 247 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है, जिसमें फरियादी के आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज संलग्न हैं।
जब फरियादी ने इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई, तो आरोपियों ने उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी होने और तत्काल कार्रवाई का डर दिखाया। इसके बाद व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए फरियादी को लगातार मानसिक दबाव में रखा गया। आरोपियों ने फरियादी से आधार कार्ड सहित अन्य निजी दस्तावेज हासिल किए और उसके मोबाइल फोन में Signal App इंस्टॉल करवाया।
अपराधियों ने वीडियो कॉल के दौरान न्यायालय जैसा फर्जी सेटअप तैयार कर जज, वकील और गवाहों का नाटकीय दृश्य दिखाया और फरियादी को तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति में रखकर भयभीत किया। इसी भय और छल के माध्यम से आरोपियों ने फरियादी की संपत्ति, बैंक खातों और आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त कर 15 नवंबर 2025 से 12 दिसंबर 2025 के बीच कुल 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
पुलिस की त्वरित और संगठित कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए फरियादी की शिकायत पर रतलाम पुलिस ने तत्काल ई-एफआईआर दर्ज की। थाना दीनदयाल नगर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 308, 111 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) एवं 66(डी) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) राकेश खाखा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विवेक कुमार लाल के मार्गदर्शन में 18 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्य, बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर आरोपियों की पहचान कर अंतरराज्यीय स्तर पर कार्रवाई की गई।
अंतरराज्यीय गिरफ्तारी और खुलासे
जांच के दौरान जबलपुर, नीमच, गुजरात और अन्य राज्यों में दबिश देकर निम्न आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जिसमे जबलपुर से अशोक जायसवाल (61 वर्ष), सनी जायसवाल (34 वर्ष), सारांश उर्फ शानु तिवारी (18 वर्ष) तथा एक विधि विरुद्ध बालक को गिरफ्तार किया गया, जिनके खातों में ठगी की राशि में से 14 लाख रुपये प्राप्त होना पाया गया। नीमच जिले के नयागांव से आरोपी पवन कुमावत (23 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया, जिसके खाते में 14 लाख रुपये की संदिग्ध राशि जमा पाई गई।
इसके अतिरिक्त अमरेन्द्र कुमार मौर्य (34 वर्ष), जो एक NGO संचालक है, को गिरफ्तार किया गया, जिसके बैंक खाते में 50 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन सामने आया। गुजरात के जामनगर से आरिफ, हमीद खान पठान, शाहिद कुरेशी एवं सादिक हसन समा को गिरफ्तार किया गया, जिनके द्वारा ठगी की राशि से क्रिप्टो करेंसी खरीदकर लगभग 5 लाख रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया गया। पुलिस की एक टीम बिहार रवाना की गई है, जबकि गुजरात में फरार अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।
इनकी रही सराहनीय भूमिका
इस जटिल और संगठित साइबर अपराध के सफल अनावरण में निरीक्षक अमित कोरी, निरीक्षक शंकर सिंह चौहान, उप निरीक्षक अनुराग यादव, उप निरीक्षक प्रवीण वास्कले, उप निरीक्षक जीवन बरिया सहित पुलिस बल के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष भूमिका रही। रतलाम पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ एक चेतावनी है। साथ ही पुलिस ने आम नागरिकों से अपील है कि किसी भी प्रकार की “डिजिटल अरेस्ट”, फर्जी कॉल या धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें। सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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