मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कटघर थाना क्षेत्र में स्थित लाजपतनगर की श्रीराम सोसायटी इन दिनों सामाजिक और सांस्कृतिक चर्चा का एक प्रमुख विषय बनी हुई है। सोसायटी के आसपास के इलाके की सामाजिक संरचना में बदलाव के डर के चलते यहाँ के कुछ निवासियों ने अपने घरों के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर अपनी चिंता जाहिर की है। ये पोस्टर स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि यह सोसायटी पूर्णतः हिंदू सनातनी परिवारों की है और इसे किसी भी अन्य धार्मिक समुदाय, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
सोसायटी के कई परिवारों का मानना है कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना आवश्यक है। यहाँ स्थित पार्क में भगवान श्रीराम का मंदिर है जहां नियमित पूजा-अर्चना होती है और वे चाहते हैं कि ऐसी धार्मिक गतिविधियों को कोई बाधा न पहुंचाए। उनके अनुसार, यदि यहां दूसरे समुदाय के लोग बसने लगे तो उनकी धार्मिक परंपराओं में व्यवधान आ सकता है और उनकी संस्कृति प्रभावित हो सकती है।
सोसायटी के निवासियों ने अपने घरों के बाहर श्रीराम की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए हैं और सोसायटी के मुख्य द्वार पर भी बड़े अक्षरों में “हिंदू सोसायटी” लिखा बोर्ड लगाया गया है। उन्होंने सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उनकी सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान बनी रहे। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी यहां के कई निवासियों ने अपनी व्यथा जाहिर की है।
सोनी नामक एक महिला निवासी ने बताया कि वे सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, खासकर हाल के माहौल और सोशल मीडिया में फैल रही खबरों को ध्यान में रखते हुए। उनका कहना है कि वे नहीं चाहतीं कि मुस्लिम समुदाय के लोग इस सोसायटी में आकर बसें क्योंकि इससे सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने अन्य हिंदू परिवारों से अपील की है कि वे अपने मकान बिल्कुल भी दूसरे समुदाय के लोगों को न बेचें।
दूसरी ओर, सुनील रस्तोगी ने कहा कि सोसायटी में कुछ लोग ऊंची कीमत देकर मकान खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे वहां के निवासी सहन नहीं कर सकते। उन्होंने सरकार से ऐसे कानून बनाने की मांग की है, जो बहुसंख्यक समुदाय वाले इलाकों में शांति और सुरक्षा को बनाए रखें। सुनील ने बताया कि सोसायटी में लगभग 70 मकान हैं और यहां हाल के दिनों में कई खरीदार आए, लेकिन उन्हें स्थानीय लोगों ने मिलकर मना कर दिया।
स्थानीय निवासी नीरज अग्रवाल ने भी इस समस्या पर जोर देते हुए कहा कि अभी के वक्त में पोस्टर लगाना उनके लिए आवश्यक कदम था। वे बताते हैं कि आसपास के कई बाहरी इलाकों में मकान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खरीदे हैं, जिससे सोसायटी के माहौल पर भी असर पड़ने का डर बना हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर के आसपास किसी भी तरह का धार्मिक परिवर्तन नहीं होना चाहिए और यह उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं बल्कि समाज में बढ़ती धार्मिक चेतना और साम्प्रदायिकता की झलक है। आने वाले दिनों में इस इलाके में प्रशासन, स्थानीय住居民 और सामाजिक संगठनों के बीच इस मुद्दे पर गंभीर संवाद और समाधान आवश्यक होगा ताकि शांति और समरसता बनी रहे।

