लखीमपुर खीरी में नवजात की मौत: पिता ने शव बैग में लेकर मांगा डीएम से इंसाफ, अस्पताल सील

Rahul Maurya
photo Credit: संवाद न्यूज एजेंसी

लखीमपुर खीरी, राष्ट्रबाण: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक दिल दहलाने वाली घटना ने लोगों को झकझोर दिया। एक निजी अस्पताल में कथित लापरवाही के चलते एक नवजात की मौत हो गई, जिसके बाद बच्चे का पिता अपने मासूम के शव को बैग में लेकर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के कार्यालय पहुंचा। पिता ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया।

क्या हुआ था अस्पताल में

विपिन गुप्ता, जो भिरा थाना क्षेत्र के नौसार जोगी गांव के निवासी हैं, ने बताया कि उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी रूबी को महेवागंज के गोलदार अस्पताल में भर्ती कराया था। विपिन के मुताबिक, अस्पताल ने सामान्य प्रसव के लिए 10,000 रुपये और सिजेरियन डिलीवरी के लिए 12,000 रुपये की मांग की। जैसे-जैसे रूबी की हालत बिगड़ती गई, अस्पताल ने इलाज शुरू करने से पहले 25,000 रुपये जमा करने को कहा। विपिन ने रात 2:30 बजे तक पैसे जमा किए, लेकिन अस्पताल ने और पैसे मांगे। इस दौरान गलत दवाइयों के कारण बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। रूबी की हालत भी गंभीर हो गई, जिसके बाद उसे दूसरे अस्पताल में भेजा गया।

पिता की इंसाफ की पुकार

नवजात की मौत से आहत विपिन अपने बच्चे के शव को एक बैग में लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने रोते हुए अधिकारियों से पूछा, “मेरी पत्नी अपने बच्चे के बारे में पूछ रही है, मैं उसे क्या जवाब दूं?” उनकी यह गुहार सुनकर मौके पर मौजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संतोष गुप्ता, सदर एसडीएम अश्वनी कुमार और शहर कोतवाल हेमंत राय तुरंत हरकत में आए। विपिन ने अस्पताल के डॉ. मनिश गुप्ता और डॉ. हुकुमा गुप्ता पर लापरवाही और पैसे की उगाही का आरोप लगाया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़का दिया, और कई लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। गोलदार अस्पताल को सील कर दिया गया, और वहां भर्ती मरीजों को जिला महिला अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। डीएम के निर्देश पर एडीएम एके रस्तोगी ने सृजन अस्पताल का दौरा किया, जहां रूबी का इलाज चल रहा है, और बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीएम कार्यालय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि जिला प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई निजी अस्पताल मरीजों से मोटी रकम वसूलते हैं, लेकिन इलाज में लापरवाही बरतते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार निजी अस्पतालों पर सख्त निगरानी रखे और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए। इस बीच, विपिन और उनके परिवार की मदद के लिए प्रशासन ने रूबी के इलाज का पूरा खर्च उठाने का वादा किया है।

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