लंदन, ब्रूसेल्स और कोपेनहेगन से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच छिड़ी जंग खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि यूरोपीय देश इस रणनीतिक इलाके में अमेरिका के हितों को चुनौती दे रहे हैं. वहीं यूरोप इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मामला बता रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामानों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया. ये वही देश हैं जिन्होंने हाल के महीनों में ग्रीनलैंड में सीमित सैन्य मौजूदगी दर्ज कराई थी. ट्रंप का यह फैसला अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगियों की अर्थव्यवस्था पर सीधा वार माना जा रहा है.
जर्मनी का यू-टर्न
टैरिफ के ऐलान के तुरंत बाद जर्मनी ने ग्रीनलैंड से अपनी 15 सैनिकों की टोही टीम को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी. एबीसी न्यूज़ के अनुसार, ये सैनिक एक सिविलियन फ्लाइट से कोपेनहेगन लौट रहे हैं. आधिकारिक तौर पर इसे ‘री-डिप्लॉयमेंट’ कहा गया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप के दबाव के बाद किया गया डैमेज कंट्रोल है. आर्थिक मंदी से जूझ रहा जर्मनी अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर का जोखिम नहीं उठाना चाहता.
आठ देश अब भी अड़े
जहां जर्मनी ने सैन्य स्तर पर कदम पीछे खींचे हैं, वहीं आठ यूरोपीय देश अब भी अपने रुख पर कायम हैं. इन देशों ने न सिर्फ ग्रीनलैंड में मौजूदगी बनाए रखने का संकेत दिया है, बल्कि सुरक्षा अभ्यास और फाइटर जेट्स की तैनाती भी जारी रखी है. यह साफ संदेश है कि यूरोप सामूहिक रूप से अमेरिका के दबाव में झुकने को तैयार नहीं.
EU की एकजुटता का संदेश
यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ‘X’ पर कहा कि आर्कटिक में शांति और सुरक्षा यूरोप और अमेरिका दोनों के साझा हित हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ ट्रान्सअटलांटिक रिश्तों को कमजोर करेंगे और खतरनाक गिरावट की ओर ले जाएंगे. उनके मुताबिक, यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट और प्रतिबद्ध रहेगा.
काजा कैलास की दो टूक
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच टकराव का असली फायदा चीन और रूस को मिलेगा. उन्होंने लिखा कि सहयोगियों के बीच विभाजन दुश्मनों के लिए जश्न का मौका होता है. कैलास ने जोर दिया कि ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दे नाटो के भीतर सुलझाए जाने चाहिए, न कि टैरिफ और धमकियों के जरिए.
मैक्रों और स्टारमर का सख्त रुख
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस संप्रभुता और स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने टैरिफ धमकियों को अस्वीकार्य बताया. वहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि नाटो सहयोगियों पर टैरिफ लगाना सामूहिक सुरक्षा की भावना के खिलाफ है.
1 फरवरी पर टिकी दुनिया की नजर
जर्मनी का सैनिक हटाना भले ही ट्रंप के लिए एक छोटी जीत हो, लेकिन यूरोप का राजनीतिक नेतृत्व झुकने को तैयार नहीं है. अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर हैं, जब टैरिफ लागू होने की संभावना है. अगर ट्रंप अपने फैसले पर कायम रहते हैं, तो यह पश्चिमी दुनिया की एकता के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. ग्रीनलैंड, जो कभी शांत और दूरदराज इलाका माना जाता था, आज वैश्विक जियोपॉलिटिक्स का सबसे विस्फोटक केंद्र बन चुका है.
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