तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्र में दो अनुसूचित जनजाति दंपतियों ने इस विधानसभा चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह ऐतिहासिक पल उनके लिए अत्यंत महत्वपूण् है क्योंकि वे हाल ही में ही मतदाता पहचान पत्र प्राप्त कर सके थे।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इन दंपतियों को हाल ही में उनकी वोटर आईडी कार्ड मिले, जिससे वे चुनाव में भाग लेने हेतु योग्य हुए। उनकी पहली बार मतदान में भागीदारी न केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों की प्राप्ति दर्शाती है, बल्कि समाज में उनकी भागीदारी को भी मजबूत करती है।
स्थानीय निवासी रामलिंगम और उनकी पत्नी मीनाक्षी ने बताया कि वे इस चुनाव में पहली बार मतदान कर रहे हैं और इसे वे अपने प्रति एक जिम्मेदारी मानते हैं। रामलिंगम ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हम अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा सके।”
जानकारों का कहना है कि चुनाव आयोग व संबंधित प्रशासन द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदायों को मतदाता पहचान पत्र प्रदान करने और मतदान प्रक्रिया को आसान बनाने हेतु किए गए प्रयासों का यह परिणाम है। इससे उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और जनजातीय समुदाय के विकास में मदद मिलेगी।
इस चुनाव में मतदाता सशक्तिकरण के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा जागरूकता अभियान भी चलाए गए थे, जिनका लाभ भी इन दंपतियों को मिला। उन्होंने बताया कि मतदान केंद्र तक पहुंचने में उन्हें कोई कठिनाई नहीं हुई और मतदान प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति समुदाय का बढ़ता मतदान प्रतिशत चुनाव परिणामों में भी प्रभाव डालेगा और उनकी समस्याओं को सरकार के समक्ष उठाने में सहायता करेगा। तमिलनाडु में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां अभी भी जनजातीय समुदाय की भागीदारी सीमित है, इसलिए इस तरह की घटनाएं एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही हैं।
इस चुनाव में पहली बार वोट देने वाले ये दंपति उम्मीद करते हैं कि उनकी भागीदारी से सरकार उनकी आवश्यकताओं को समझेगी और स्थानीय विकास कार्यों पर ध्यान देगी। सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में यह कदम एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
संक्षेप में कहा जाए तो, तमिलनाडु में दो अनुसूचित जनजाति दंपतियों द्वारा पहली बार मतदान करना न केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों की पुष्टि करता है बल्कि यह प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की व्यापक पहुंच और सशक्तिकरण का भी प्रतीक है।

