आखिर आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी? सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुलेआम अवहेलना, नगर पालिका मौन

मध्यप्रदेश के सिवनी नगर में आवारा कुत्तों का कहर इस कदर बढ़ गया है कि महज 24 घंटे के भीतर 30 लोगों को काटने की घटनाओं ने पूरे शहर में दहशत फैला दी है। गलियों, सड़कों और बाजारों में आमजन का निकलना मुश्किल हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद सिवनी नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय नजर आ रहा है। नगर पालिका के सीएमओ पर सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप लग रहा है, वहीं भाजपा शासित नगर पालिका और उसके निर्वाचित जनप्रतिनिधि आंख मूंदे बैठे हैं।

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    सिवनी, राष्ट्रबाण। सिवनी नगर इन दिनों आवारा कुत्तों के आतंक से कराह रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों-बस स्टैंड, सब्जी मंडी, स्कूलों के आसपास और रिहायशी कॉलोनियों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। बीते दिनों 24 घंटों में 30 लोगों को कुत्तों द्वारा काटे जाने की पुष्टि ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले कई महीनों से आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन नगर पालिका ने न तो नसबंदी अभियान चलाया और न ही नियमित टीकाकरण की व्यवस्था की। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की नगर पालिकाओं और नगर निगमों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आवारा कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी और टीकाकरण अनिवार्य किया जाए, ताकि आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद सिवनी नगर पालिका इन आदेशों को कागजों तक सीमित रखे हुए है।

    सूत्रों के मुताबिक नगर पालिका के सीएमओ इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि न तो उन्होंने कोई ठोस कार्ययोजना बनाई और न ही आवारा कुत्तों के लिए बजट का सही उपयोग किया। नगर में न तो डॉग शेल्टर की समुचित व्यवस्था है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। नतीजा यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है और इसकी कीमत आम नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर चुका रहे हैं।

    राजनीतिक जिम्मेदारी की बात करें तो सिवनी नगर पालिका भाजपा शासित है। ऐसे में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराएं। लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोडिया पर आरोप लग रहे हैं कि वे इस पूरे मामले में ‘गांधारी’ की भूमिका निभा रहे हैं, सब कुछ जानते हुए भी आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं। न तो उन्होंने मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया और न ही प्रशासन पर कोई दबाव बनाया। शहर के नागरिकों में भारी आक्रोश है।

    बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह समस्या और विकराल रूप लेगी। अभिभावक खासतौर पर चिंतित हैं क्योंकि स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में हैं। कई कॉलोनियों में लोग लाठी और डंडे लेकर पहरा देने को मजबूर हैं, जो एक सभ्य शहर के लिए शर्मनाक स्थिति है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने की घटनाएं केवल चोट तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा भी पैदा करती हैं। यदि समय पर टीकाकरण और नियंत्रण नहीं किया गया तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। इसके बावजूद नगर पालिका की ओर से सिर्फ लापरवाही देखने को मिल रही हैं, जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

    अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सिवनी नगर पालिका सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से लेगी या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही प्रशासन जागेगा? क्या भाजपा शासित नगर पालिका अपने ही शासनकाल में जनता की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगी? फिलहाल तो सिवनी के लोग दहशत और गुस्से के बीच यह सवाल पूछ रहे हैं, आखिर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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