वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के प्रमुख कैथरीन टी. ग्रीयर ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की कमेटी ऑन वेज़ एंड मीन्स को दिए बयान में कहा कि भारत एक ‘टफ नट टू क्रैक’ यानी कठिन समस्या है, विशेषकर कृषि बाजारों के संरक्षण के मामले में। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने कृषि बाजारों की रक्षा कई दशकों से की है।
ग्रीयर ने भारत के व्यापार वातावरण की जटिलताओं और अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, “भारत ने लंबे समय से अपनी कृषि नीतियों को संरक्षित रखा है, जिससे यह क्षेत्र विदेशी निवेश और आयात के लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन जाता है।” उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएं पूरी हो रही हैं और कई मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं।
भारतीय कृषि बाजारों की रक्षा को लेकर ग्रीयर की यह बात व्यापार विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। भारत में किसानों और कृषि हितधारकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे सरकार पर दबाव रहता है कि वे कृषि संवर्धन के लिए संरक्षणवादी नीति अपनाएं। इस वजह से भारत के कृषि बाजार विदेशी कंपनियों के लिए प्रवेश क्षेत्र के रूप में काफी जटिल और बहुआयामी हो जाते हैं।
यह बयान अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह भारत के साथ नीतिगत अंतर और बाज़ार पहुँच संबंधी बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए इन मुद्दों पर बातचीत अत्यंत आवश्यक है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता का राउंड कई दिनों तक चला, जिसमें दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया। हालांकि, भारत की कृषि नीतियों को लेकर अमेरिका की चिंता बनी रही। ग्रीयर ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों के लिए और संवाद आवश्यक होगा ताकि दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रहें।
इस वार्ता के दौरान, भारत ने अपने कृषि बाजारों की अक्षुण्णता और किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। कई विशेषज्ञों का यह मानना है कि भारत की यह नीति राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार, यूएसटीआर ग्रीयर के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि भारत अपनी कृषि सुरक्षा के सवालों को लेकर दृढ़ है और इसे व्यापार वार्ता में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में देखा जाना चाहिए। अमेरिका के लिए यह चुनौती है कि वह भारतीय बाजारों में अपनी पहुँच को विस्तार देने के साथ-साथ भारतीय हितों का सम्मान भी करे।

