नई दिल्ली। चुनाव आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2026 विधानसभा चुनाव में शाम 8 बजे तक मतदान प्रतिशत 83.41% दर्ज किया गया, जो 2021 के चुनावों में रिकॉर्ड हुए 59.75% से काफी अधिक है। यह अप्रत्याशित वृद्धि मतदाता संख्या में कमी के परिणामस्वरूप सामने आई है।
2021 के चुनावों में मतदाता संख्या लगभग 40.57 लाख थी, जो इस बार घटकर 28.93 लाख हो गई है। इस प्रकार, मतदाता सूची में करीब 11.64 लाख की कमी आई है। हालांकि, दोनों चुनावों में मतदान करने वालों की संख्या लगभग 24 लाख के आसपास ही बनी रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, सूची में इस तरह की गिरावट का मुख्य कारण मतदाता पहचान और पुनरीक्षण प्रक्रिया है, जिसके तहत अनावश्यक या निष्क्रिय मतदाताओं की संख्या कम की गई है। साथ ही, मतदान केंद्रों की बेहतर व्यवस्था और जागरूकता अभियानों ने भी इस बार उच्च मतदान प्रतिशत सुनिश्चित किया है।
चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट पर जारी प्रेस नोट में बताया है कि मतदान का प्रतिशत पिछले चुनावों की तुलना में काफी सुधार हुआ है, जो लोकतंत्र की स्वस्थ प्रक्रिया और जनता की जागरूकता का संकेत है।
राजनीतिक पार्टियों ने भी उच्च मतदान प्रतिशत का स्वागत किया है और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती के रूप में देखा है। उन्होंने मतदाताओं से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि जनता ने अपनी जिम्मेदारी के साथ लोकतंत्र को मजबूत किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता संख्या में इस तरह की कमी के बावजूद स्थिर मतदान संख्या यह दर्शाती है कि चुनाव में लोगों की भागीदारी में कोई गिरावट नहीं आई है। यह चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के पक्ष में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
इस प्रकार, 2026 विधानसभा चुनाव में पोस्ट-SIR मतदाता कमी के बाद भी मतदान दर में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है, जिससे मतदान के प्रति जनता का उत्साह और लोकतंत्र के प्रति विश्वास प्रदर्शित होता है।

