संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को चेतावनी दी है कि देशों द्वारा प्रस्तुत कार्बन-कटौती के वादे 2035 तक केवल 10 प्रतिशत उत्सर्जन कटौती तक सीमित रहेंगे, जो कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है। यह बात संयुक्त राष्ट्र ने तब कही जब अधिकांश देशों ने अपनी जलवायु योजनाओं को समय पर प्रस्तुत नहीं किया था, जिससे एक ठोस वैश्विक स्थिति पर नजर रखना कठिन हो गया।
संयुक्त राष्ट्र की इस ताजा रिपोर्ट में चीन, जो विश्व का सबसे बड़ा प्रदूषक है, ने 2035 तक 7 से 10 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम करने का अपना पहला पूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य घोषित किया है। इस लक्ष्य को लेते हुए भी वैश्विक उत्सर्जन घटाने के लिए यह कटौती पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सभी देश मिश्रित और कमजोर प्रतिबद्धताओं के साथ आगे बढ़े तो 2035 तक कार्बन उत्सर्जन में सिर्फ 10 प्रतिशत की गिरावट होने से वैश्विक तापमान बढ़ने की गति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसे देखते हुए जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों में वृद्धि होने का खतरा बढ़ जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा कि अधिक देशों को अपने उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है और उन्हें समय पर अपनी योजनाएं प्रस्तुत करनी चाहिए ताकि एक स्पष्ट और व्यापक वैश्विक रणनीति तैयार की जा सके। उन्होंने यह भी जोर दिया कि वैश्विक warming को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
विश्व के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं और पर्यावरणीय संकट लगातार गंभीर रूप धारण कर रहे हैं। इस बीच, जलवायु लक्ष्यों की अधूरी और अपर्याप्त प्रतिबद्धताएं एक बड़ी चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही हैं, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा बन सकती है।
इसलिए वैश्विक समुदाय से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे न केवल अपनी जलवायु नीतियों को सशक्त बनाएं, बल्कि इसे पारदर्शी तरीके से लागू करते हुए जलवायु संकट से निपटने में वास्तविक और टिकाऊ योगदान करें। संयुक्त राष्ट्र की आगामी बैठकें और सम्मेलनों में इस मुद्दे पर जोरदार चर्चा होने की संभावना है।

