देवी सती के शरीर के अंगों से हुई हैं 51 शक्ति पीठों की स्थापना: पं. अनुदेश तिवारी जी

Rashtrabaan

सिवनी, राष्ट्रबाण। केवलारी नगर के वॉर्ड नंबर 13 रानी अवंती बाई वार्ड में गणेशोत्सव के पवन अवसर पर दिनांक 28/08/2025 दिन गुरुवार से 04/09/2025 तक सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन जारी है इस कथा का वाचन प्रसिद्ध कथावाचक वैदिक पंडित अनुदेश तिवारी जी के श्रीमुख से भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन प्रति दिन दोपहर 02 बजे से शाम 05 बजे तक हो रहा है। जिसको श्रवण करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।

कल दिनांक 30/08/2025 की कथा में पंडित अनुदेश तिवारी जी द्वारा देवी के 51 शक्ति पीठ बनने के पीछे की जो पौराणिक कथा को श्रवण करवाया गया, उनके अनुसार भगवान शिव की पहली पत्नी देवी सती के पिता दक्ष प्रजापति ने कनखल जिसको वर्तमान में हरिद्वार के नाम से जाना जाता है में ‘बृहस्पति सर्व’ नाम का एक महा यज्ञ किया था । उस यज्ञ में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया था लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया था। लेकिन इसके बावजूद भगवान शिव की पत्नी जो कि दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं वह बिना आमंत्रित किये और अपने पति के रोकने के बावजूद उस यज्ञ में शामिल हो गयीं थी।

उस समय यज्ञ-स्थल पर देवी सती ने अपने पिता से भगवान शिव को आमंत्रित न करने की वजह पूछी और अपनी नाराज़गी प्रकट की । इस पर दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव को अपशब्द कहे, जिसके अपमान से पीड़ित होकर देवी सती ने यज्ञ के अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी ! भगवान शिव को जब इस दुर्घटना का पता चला तो क्रोध की वजह से उनका तीसरा नेत्र खुल गया और वे क्रोध की वजह से तांडव करने लगे, इसके पश्चात भगवन शिव ने यज्ञ-स्थल पर पहुंच कर यज्ञकुंड से देवी सती के पार्थिव शरीर को निकाला और कंधे पर उठा लिया और दुखी मन से वापस कैलाश पर्वत की ओर जाने लगे । इस दौरान देवी सती के शरीर के अंग जिन जगहों पर गिरे वह स्थान शक्ति पीठ कहलाये। जो कि वर्तमान समय में भी उन जगहों पर स्थित हैं और आज भी पूजे जाते हैं।

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