नंदीग्राम में बीजेपी की शानदार जीत 12-0 से टीएमसी का सफाया, तनाव के बीच जश्न

Rahul Maurya

कोलकाता, राष्ट्रबाण: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सहकारी समिति चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों ने सभी 12 सीटों पर कब्जा जमाकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी शिकस्त दी। इस जीत ने न केवल बीजेपी कार्यकर्ताओं में जोश भरा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की सियासत में हलचल मचा दी। हालांकि, इस जीत के बाद नंदीग्राम में तनाव का माहौल भी देखा गया, जब बीजेपी के विजयी जुलूस के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की स्थिति बन गई।

नंदीग्राम का सियासी महत्व

नंदीग्राम लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था, जिसने इस क्षेत्र को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। इस बार सहकारी समिति चुनाव में बीजेपी की 12-0 की जीत ने पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया है। बीजेपी नेताओं का दावा है कि यह जीत नंदीग्राम में उनकी मेहनत और जनता के भरोसे का नतीजा है। शुभेंदु अधिकारी ने इस जीत को जनता की जीत करार देते हुए कहा कि यह 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की मजबूत स्थिति का संकेत है।

जीत के बाद तनाव और जश्न

चुनाव परिणाम घोषित होते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम में विजयी जुलूस निकाला। उत्साह के इस माहौल में मिठाइयां बांटी गईं और आतिशबाजी की गई। लेकिन यह जश्न जल्द ही तनाव में बदल गया, जब बीजेपी समर्थकों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई। खबरों के मुताबिक, बीजेपी के जुलूस के दौरान टीएमसी के स्थानीय कार्यालय पर हमले की कोशिश हुई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया। इस घटना ने नंदीग्राम में सियासी तनाव को और गहरा कर दिया।

टीएमसी का जवाबी हमला

टीएमसी ने इस हार को स्वीकार करने में असमर्थता दिखाई और बीजेपी पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। टीएमसी नेताओं का कहना है कि बीजेपी ने इस जीत के लिए अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया और स्थानीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया। एक टीएमसी प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी इस हार का विश्लेषण कर रही है और जल्द ही जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करेगी। दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि टीएमसी अपनी हार को पचा नहीं पा रही है और झूठे दावों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है।

बंगाल की सियासत पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम की यह जीत बीजेपी को 2026 के विधानसभा चुनाव में और आक्रामक बनाएगी। यह जीत न केवल स्थानीय स्तर पर बीजेपी की ताकत दिखाती है, बल्कि टीएमसी के गढ़ में सेंध लगाने की उसकी रणनीति को भी रेखांकित करती है। ममता बनर्जी के लिए यह हार एक बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि नंदीग्राम उनकी सियासी प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में बंगाल की राजनीति और गर्माएगी, और यह जीत बीजेपी के लिए एक नया आत्मविश्वास लेकर आई है।

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