जम्मू-कश्मीर के डोडा में बादल फटने से तबाही, 10 से अधिक घर ध्वस्त, तीन की मौत

Rahul Maurya
डोडा में बादला फटा - फोटो : X @ANI

जम्मू, राष्ट्रबाण: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में मंगलवार को बादल फटने से भारी तबाही मची। भालेसा क्षेत्र के थाथरी उप-मंडल में हुई इस घटना में 10 से अधिक घर नष्ट हो गए, और तीन लोगों की मौत हो गई। लगातार भारी बारिश के कारण भूस्खलन, मिट्टी धंसने (मडस्लाइड), और पत्थर गिरने (शूटिंग स्टोन्स) की घटनाएँ हुईं, जिससे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) सहित कई संपर्क सड़कें बंद हो गईं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 अगस्त तक डोडा, किश्तवाड़, रामबन, कठुआ, और जम्मू जैसे जिलों में भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़, और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।

तबाही का मंजर

डोडा के गंधोर और थाथरी में बादल फटने से चिनाब नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब 899.3 मीटर तक पहुँच गया, जो उच्चतम जलस्तर (900 मीटर) से केवल सवा मीटर कम है। डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह ने बताया कि दो मौतें गंधोर में और एक थाथरी में हुई। 15 रिहायशी घर, गौशालाएँ, एक निजी स्वास्थ्य केंद्र, और तीन पैदल पुल बह गए। NH-244 का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ। चिनाब नदी के किनारे और सड़कों पर आवाजाही सीमित कर दी गई है, और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।

प्रशासन का राहत कार्य

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को गंभीर बताते हुए श्रीनगर से जम्मू के लिए उड़ान ली, ताकि राहत कार्यों की निगरानी कर सकें। उन्होंने जिला आयुक्तों को आपातकालीन बहाली के लिए अतिरिक्त फंड आवंटित करने के निर्देश दिए। जम्मू डिवीजनल कमिश्नर ने आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की और नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी। NDRF और SDRF की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। जम्मू में सभी स्कूल बंद कर दिए गए, और JKBOSE ने 27 अगस्त की 10वीं और 11वीं कक्षा की परीक्षाएँ स्थगित कर दीं।

मौसम विभाग की चेतावनी

IMD ने दक्षिणी जम्मू क्षेत्र में रेड अलर्ट और उत्तरी जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कठुआ में 24 घंटों में 155.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि भद्रवाह में 99.8 मिमी बारिश हुई। तवी, चिनाब, और बंसतर नदियाँ खतरे के निशान के करीब हैं। मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक बादल फटने, बाढ़, और भूस्खलन का जोखिम बताया है। लोगों से नदियों, नालों, और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने को कहा गया है।

व्यापक प्रभाव

जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर चंद्रकोट, केला मोड़, और बैटरी चश्मा में भूस्खलन और पत्थर गिरने से यातायात रुका हुआ है। किश्तवाड़ और राजौरी में भी घर और गौशालाएँ क्षतिग्रस्त हुईं। यह घटना किश्तवाड़ और कठुआ में हाल की बाढ़ के बाद आई है, जहाँ चार लोगों की मौत हुई थी। जम्मू क्षेत्र में तवी नदी 20 फीट के खतरे के निशान को पार कर चुकी है।

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