नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान 205.33 मीटर को पार कर 205.91 मीटर तक पहुँच गया है, जिसके चलते केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने बाढ़ की चेतावनी जारी की है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश और हरियाणा के हथिनीकुंड और वज़ीराबाद बैराज से छोड़ा गया भारी मात्रा में पानी यमुना के उफान का कारण बना है।
मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की भविष्यवाणी की है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने यमुना खादर, कश्मीरी गेट, मजनू का टीला, गीता कॉलोनी, और यमुना बाज़ार जैसे निचले इलाकों में रहने वालों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
यमुना के बढ़ते जलस्तर का प्रभाव
मंगलवार रात 9 बजे, ओल्ड रेलवे ब्रिज पर यमुना का जलस्तर 204.56 मीटर था, जो चेतावनी स्तर 204.50 मीटर से ऊपर था। बुधवार सुबह तक यह 205.91 मीटर तक पहुँच गया, जो खतरे के निशान को पार करता है। CWC ने अनुमान लगाया है कि अगले 24-48 घंटों में जलस्तर 206 मीटर तक पहुँच सकता है, जिसके बाद निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर निकासी शुरू होगी।
यमुना बाज़ार और आसपास के क्षेत्रों में पानी घुस चुका है, जिससे सड़कें, घर, और खेत जलमग्न हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बाढ़ ने उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को ठप कर दिया है, स्कूल बंद हैं, और छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन की तैयारियाँ
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना बाज़ार, असीता घाट, और छठ घाट का दौरा कर बाढ़ प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्थिति नियंत्रण में है और 14 नावें राहत व बचाव के लिए तैनात की गई हैं। छह जिलों पूर्व, दक्षिण-पूर्व, उत्तर, उत्तर-पूर्व, मध्य, और दक्षिण में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
गुप्ता ने कहा, “हमने 2023 की बाढ़ से सबक लिया है, जब यमुना 208.66 मीटर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँची थी। इस बार ऐसी स्थिति नहीं होगी।” प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील की है। फरीदाबाद में भी जिला प्रशासन ने मोहना और लतीपुर जैसे गाँवों में 24×7 निगरानी शुरू कर दी है।
बाढ़ के कारण और चिंताएँ
हथिनीकुंड बैराज से 1,27,030 क्यूसेक और वज़ीराबाद बैराज से 45,620 क्यूसेक पानी प्रति घंटे छोड़ा जा रहा है, जो 48-50 घंटों में दिल्ली पहुँचता है। हिमाचल और उत्तराखंड में लगातार बारिश ने स्थिति को और जटिल बनाया है। IMD ने 27-28 अगस्त को दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश और 35 डिग्री सेल्सियस तक तापमान की भविष्यवाणी की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊपरी यमुना क्षेत्र में बारिश और बैराज से पानी छोड़ना बाढ़ का प्रमुख कारण है। 2023 में दिल्ली ने 45 साल का सबसे भीषण बाढ़ का सामना किया था, जब 25,000 लोग विस्थापित हुए थे।
CWC ने करावल नगर, गांधी नगर, कोटवाली, सिविल लाइन्स, और डिफेंस कॉलोनी जैसे क्षेत्रों को जोखिम में बताया है। यदि जलस्तर 206 मीटर को पार करता है, तो 12,500 लोगों को निकालने की योजना है। प्रशासन ने कहा कि खाद्य आपूर्ति और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था तैयार है। हालांकि, स्थानीय निवासियों में 2023 की बाढ़ की यादें ताज़ा हो रही हैं, और कई लोग पहले ही सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
Read also: अमित शाह को कैसे पता BJP सरकार 40-50 साल चलेगी? राहुल गांधी ने उठाया बड़ा सवाल