नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: केंद्र सरकार जल्द ही आम लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। खबर है कि आगामी GST काउंसिल की बैठक में रोजमर्रा की जरूरी चीजों को जीरो टैक्स स्लैब में शामिल किया जा सकता है। इसमें दूध, पनीर, रोटी और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री शामिल हो सकती हैं। यह ऐलान स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जीएसटी सुधारों की घोषणा के बाद आया है।
GST काउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला
GST काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में होने वाली है। इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टैक्स स्लैब को और सरल करना है। दूध, पनीर, और रोटी जैसी रोजमर्रा की चीजों को जीरो टैक्स स्लैब में लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इसका मकसद मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आर्थिक राहत देना है। इसके अलावा, कुछ अन्य खाद्य सामग्रियों पर भी टैक्स में कमी की संभावना है, ताकि महंगाई का बोझ कम हो।
आम लोगों को क्या फायदा?
जीरो टैक्स स्लैब में शामिल होने से दूध, पनीर, और रोटी जैसी चीजों की कीमतों में कमी आ सकती है। खास तौर पर, ग्रामीण और शहरी मध्यम वर्ग के लिए यह एक बड़ी राहत होगी। पहले से ही पैकेज्ड दूध, पनीर, और दही जैसे डेयरी उत्पादों पर 5 से 12 फीसदी तक GST लगता है। अगर इन्हें टैक्स-फ्री किया जाता है, तो उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल घरेलू बजट को राहत देगा, बल्कि छोटे दुकानदारों और डेयरी उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
GST सुधारों का व्यापक असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से GST सुधारों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि टैक्स स्लैब को और तर्कसंगत बनाया जाएगा। इस दिशा में कदम उठाते हुए, हाल ही में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में 12 और 28 फीसदी के स्लैब को खत्म करने का प्रस्ताव मंजूर हुआ है। अब ज्यादातर सामान 5 या 18 फीसदी के स्लैब में लाए जा सकते हैं। इस बदलाव से न केवल खाद्य सामग्री, बल्कि कपड़े, सीमेंट, और सैलून जैसी सेवाओं पर भी टैक्स कम होने की उम्मीद है।
GST काउंसिल की बैठक में यह भी चर्चा होगी कि टैक्स स्लैब को और सरल कैसे किया जाए। सरकार का मानना है कि इससे न केवल उपभोक्ताओं को फायदा होगा, बल्कि कारोबारियों के लिए भी टैक्स प्रक्रिया आसान होगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जीरो टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाने से सरकार के राजस्व पर असर पड़ सकता है। फिर भी, सरकार का जोर आम लोगों की जेब पर बोझ कम करने पर है।
GST काउंसिल की आगामी बैठक से देश को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अगर दूध, पनीर, और रोटी जैसी जरूरी चीजें टैक्स-फ्री होती हैं, तो यह मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए एक बड़ा तोहफा होगा। यह कदम न केवल महंगाई को नियंत्रित करने में मदद करेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी गति दे सकता है।
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