शिक्षक या जल्लाद? अर्जुनी प्राथमिक स्कूल में मासूमों पर कहर, वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में

Rashtrabaan

सिवनी, राष्ट्रबाण। शिक्षक बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं, लेकिन जब वही शिक्षक बच्चों के लिए डर और आतंक का पर्याय बन जाए, तो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। सिवनी जिले के आदिवासी बहुल विकासखंड कुरई अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला अर्जुनी से ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पदस्थ प्राथमिक शिक्षक महेश चौधरी पर मासूम बच्चों को लगातार पीटने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। हाल ही में कक्षा दूसरी के एक मासूम छात्र का गला दबाने और एक बच्ची को बेरहमी से पीटने का वीडियो वायरल हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।

वीडियो वायरल, ग्रामीणों में आक्रोश

घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से फैला। इस वीडियो में शिक्षक को छोटे बच्चों को प्रताड़ित करते साफ देखा जा सकता है। जैसे ही यह दृश्य सामने आया, बच्चों के परिजनों और ग्रामवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि महेश चौधरी लंबे समय से बच्चों के साथ मारपीट कर रहा था, लेकिन भय और दबाव के चलते कोई खुलकर शिकायत नहीं कर पा रहा था। अब जब घटना कैमरे में कैद होकर सार्वजनिक हुई, तो सच्चाई सबके सामने आ गई। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं और कई बार घर आकर बताते हैं कि शिक्षक गालियां देता है, मारता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है और उनका आत्मविश्वास भी टूट रहा है।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष पहुंचे स्कूल

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष राकेश सनोडिया तत्काल अर्जुनी स्कूल पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वयं देखा कि शिक्षक महेश चौधरी बच्चों को प्रताड़ित कर रहा है। इसके बाद जब उन्होंने ग्रामीणों और बच्चों के परिजनों से बातचीत की तो उन्होंने भी इसी प्रकार की शिकायतें दोहराईं। ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि शिक्षक का रवैया लंबे समय से ऐसा ही है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह घटना सिर्फ एक शिक्षक की बर्बरता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है। सरकार बार-बार बच्चों को भयमुक्त, गुणवत्तापूर्ण और बाल-अनुकूल शिक्षा देने का दावा करती है। लेकिन जब स्कूल का माहौल डर और प्रताड़ना से भरा हो, तो बच्चे न केवल पढ़ाई से विमुख होते हैं बल्कि उनका मानसिक विकास भी रुक जाता है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसे मामलों से बच्चों के भीतर शिक्षा के प्रति नकारात्मक भावना पैदा होती है और उनका आत्मविश्वास टूटता है।

ग्रामीणों की चेतावनी, प्रशासन सख्त

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की कि आरोपी शिक्षक को तुरंत निलंबित किया जाए और उस पर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भयावह रूप ले सकती हैं। ग्रामीणों के दबाव और वायरल वीडियो की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया और शिक्षक महेश चौधरी को निलंबित कर दिया गया। शिक्षा विभाग ने भी जांच बैठा दी है ताकि पूरे मामले की तह तक जाया जा सके।

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