दिल दहला देने वाली घटना, कूड़े में मिली बोरी से निकला नवजात, कुत्ते ने खींचा तो बची जान

Rahul Maurya

छत्रपति संभाजीनगर, राष्ट्रबाण: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक दिल दहला देने वाली घटना ने मानवता की मिसाल पेश की। एक नवजात शिशु को बोरी में बंद कर कचरे के ढेर में फेंक दिया गया था, लेकिन सतर्क नागरिकों और एक आवारा कुत्ते की वजह से बच्चे की जान बच गई। यह घटना गुरुवार को शहर के एक कचरा डंपिंग यार्ड में हुई, जब एक कुत्ता बोरी को सड़क पर घसीट रहा था। स्थानीय लोगों ने बच्चे की रोने की आवाज सुनी और उसे बचा लिया।

कचरे में मिला मासूम

घटना गुरुवार सुबह की है, जब छत्रपति संभाजीनगर के सिडको इलाके में एक कचरा डंपिंग यार्ड के पास स्थानीय लोगों ने एक कुत्ते को बोरी घसीटते देखा। बोरी से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर लोग दौड़े और बोरी खोलकर देखा तो उसमें एक नवजात शिशु था। बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। स्थानीय निवासी रमेश पाटिल ने बताया कि अगर समय पर आवाज नहीं सुनाई देती, तो बच्चा कुत्तों का शिकार हो सकता था। यह घटना शहर में सनसनी बन गई है।

माँ की तलाश में पुलिस

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों की मदद से एक 24 वर्षीय महिला को हिरासत में लिया, जिसने बच्चे को जन्म देने की बात स्वीकारी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि महिला अविवाहित थी और सामाजिक दबाव के कारण उसने बच्चे को कचरे में फेंक दिया। पुलिस ने बताया कि महिला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 317 (नवजात को छोड़ने) और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या कोई अन्य व्यक्ति इस कृत्य में शामिल था।

इस घटना में स्थानीय लोगों की त्वरित कार्रवाई ने एक मासूम की जान बचा ली। सामाजिक कार्यकर्ता अनीता शर्मा ने कहा कि यह घटना समाज में नवजातों की सुरक्षा और जागरूकता की कमी को दर्शाती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून और जागरूकता अभियान चलाए जाएँ। छत्रपति संभाजीनगर में पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जैसे कि कल्याण में एक नवजात का कूड़ेदान में मिलना।

सामाजिक और कानूनी सवाल

यह घटना सामाजिक दबाव और नवजातों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अविवाहित माताओं को सामाजिक तिरस्कार का डर इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर करता है। सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को ऐसी महिलाओं के लिए काउंसलिंग और सहायता केंद्र बढ़ाने की जरूरत है। पुलिस ने बच्चे को फिलहाल बाल कल्याण समिति के हवाले कर दिया है।

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