सिवनी, राष्ट्रबाण। अजब गजब प्रदेश के अजब गजब मामले, ऐसा ही एक मामला इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। यह मामला तहसील बरघाट के अंतर्गत ग्राम सैलुआकला का है। जहां पर अभिषेक पिता शिवशरण प्रजापति निवासी कान्हीवाड़ा द्वारा राजस्व निरीक्षक मंडल बरघाट पटवारी प.ह.नं. 1 के खसरा नं. 15 (रकबा 7.42 हेक्टेयर मद: बड़े झाड़ का जंगल) में से रकबा 2.50 हेक्टेयर पर तार फेंसिंग लगाकर अतिक्रमण किया गया। वही संदीप श्रीवास्तव अनुविभागीय अधिकारी बरघाट द्वारा तहसीलदार पर सवाल खड़े कर रहे है कि तत्कालीन तहसीलदार डॉ. संजय बरैया पर अतिक्रमण एक साल पहले क्यों नहीं हटाया है। जबकि वहीं तहसीलदार डॉ. संजय बरैया द्वारा 5 हजार रूपये का अर्थदंड करके बेदखली का आदेश जारी किया था। लेकिन सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या तहसीलदार आदेश के बाद भी अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया था या नहीं, यह तो विभाग ही बता सकता है।

लेकिन यह बात भी किसी से छुपी हुई नहीं है अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संदीप श्रीवास्तव (SDM) के ऊपर लगातार गंभीर आरोप लगाते रहते हैं कि वहां पैसे लेकर आदेश ही प्रभावशील आदेश पारित करते हैं। एक ऐसा ही गंभीर और विरोधाभासी मामला अभी जन चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें प्रशासनिक कार्यशैली पर सीधे सवाल उठ रहे हैं और सरकार की नीति पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
वही संदीप श्रीवास्तव अनुविभागीय अधिकारी के ‘अजब गजब’ बचाव का विश्लेषण वाले बयान में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। तार फेंसिंग बनाम अतिक्रमण: संदीप श्रीवास्तव का कहना है कि “फेंसिंग को अतिक्रमण नहीं कह सकते”। इस बात की जब कानूनी व्याख्या से जानकारी लिया गया तो उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर, वन भूमि या सरकारी भूमि पर बिना उचित कानूनी अनुमति के कोई भी निर्माण या स्थायी परिवर्तन करना अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।

अनाधिकृत प्रवेश और कब्ज़ाः भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 441 के तहत, किसी और की संपत्ति, जिसमें सरकारी या फिर वन भूमि शामिल है, पर बिना अनुमति के प्रवेश करना या कब्ज़ा करना अतिक्रमण या आपराधिक अतिचार माना जाता है। चाहे वह पर भले ही तार फेंसिंग अस्थायी लगती हो, यदि इसका उद्देश्य सरकारी भूमि के एक हिस्से को घेरना, अलग करना, या उस पर मालिकाना हक़ जताना है, तो इसे अतिक्रमण का कार्य माना जा सकता है।
वही शिकायतकर्ता का बयान महेश कुमार राय के आरोपों लगाया है। कि संदीप श्रीवास्तव अनुविभागीय अधिकारी राजस्व में पैसे लेकर आदेश जारी किया है और उनके द्वारा पैसे लिए बिना कोई भी कार्य नहीं किया जाता है। साथ ही यह भी कहां है कि संदीप श्रीवास्तव की कार्यप्रणाली के चर्चे अकेले बरघाट तक सीमित नहीं है। उनके द्वारा हर एक आदेश में ऊपरी पैसा कौन लेता है यह किसी से छूपा नहीं है।

क्या जिला कलेक्टर कार्यवाही में करेगी फोकस?
यह सबसे महत्वपूर्ण और तात्कालिक कदम वरिष्ठ अधिकारी का रहता है। क्या कलेक्टर मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत में तत्काल कोई कार्रवाई करेगी? क्या उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से अब तक कोई जवाब मांगा है या किसी जांच दल का गठन किया है? साथ ही क्या कलेक्टर ने इस मामले में कोई समय सीमा निर्धारित की है या नहीं? तमाम ऐसे कहीं सवालो के जवाब का इंतजार रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि कोई पटवारी कोई भी गलती करता है तो तत्काल ही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संदीप श्रीवास्तव कारण बताओं नोटिस जारी करके तमाम सवाल कर लेते है। लेकिन जब उनके ऊपर स्वयं लापरवाही भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है तो क्या कलेक्टर शीतला पटेल कुछ करेगी या फिर इसे ठंडे अवस्था में शिकायत दबा देगी।
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