सिवनी, राष्ट्रबाण। सिवनी नगर जिला मुख्यालय के पोस इलाका बारापत्थर की सड़कों पर इन दिनों रफ़्तार का जो खौफनाक मंजर दिख रहा है, वह किसी बड़े हादसे की आहट दे रहा है। नाबालिग हाथों में वाहन का हैंडल और क्लच क्या आए, वे खुद को सड़क का बादशाह समझने लगे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जिन कंधों पर इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी है यानी अभिभावक और कोचिंग संचालक वे ही इस खतरे से आंखें मूंदे बैठे हैं।
रफ्तार का जुनून या मौत का निमंत्रण?
कोचिंग सेंटरों के बाहर छुट्टी के वक्त का नजारा किसी रेसिंग ट्रैक जैसा होता है। 15 से 17 साल के बच्चे, बिना हेलमेट और बिना लाइसेंस के, भारी-भरकम दुपहिया वाहनों को हवा से बातें कराते नजर आते हैं। वही अभिभावकों की लापरवाही की बात कि जाए तो क्या अपने लाडले को महंगी बाइक दिला देना ही प्रेम है? बिना लाइसेंस गाड़ी सौंपकर माता-पिता अनजाने में अपने ही बच्चों के लिए गड्ढा खोद रहे हैं। वही कोचिंग संचालकों की चुप्पी भी बहुत कुछ बोल रही है। सिर्फ फीस वसूलना ही जिम्मेदारी नहीं है। संस्थान के बाहर बेतरतीब खड़ी गाड़ियां और वहां से उड़ती धूल के साथ रफ़्तार भरते छात्र क्या संचालकों को नजर नहीं आते?
पुलिस की चुनौती और यातायात विभाग की भूमिका
हालांकि, सिवनी पुलिस और यातायात विभाग समय-समय पर चालानी कार्रवाई कर अपनी मुस्तैदी दिखाता है, लेकिन पुलिस हर घर में पहरा नहीं दे सकती। पुलिस का चालान जेब पर असर डालता है, लेकिन अभिभावकों की लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। यातायात विभाग को अब समझाइश के साथ-साथ उन अभिभावकों पर भी सख्त कानूनी शिकंजा कसने की जरूरत है, जो अपने बच्चों को मौत की गाड़ी सौंप रहे हैं।
आखिर कब जागेगा प्रशासन?
जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या यातायात विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? सिवनी की संकरी गलियों में ये नाबालिग राइडर्स न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि राह चलते बुजुर्गों और मासूमों के लिए भी काल बन रहे हैं। वही अब वक्त की पुकार है कि अब केवल बैनर-पोस्टर से काम नहीं चलेगा। पुलिस और परिवहन विभाग को कोचिंग संचालकों की बैठक लेनी होगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले नाबालिगों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी थाने की दहलीज तक लाना होगा।
सिवनी जिला प्रशासन को यह समझना होगा कि सुरक्षा केवल फाइलों में नहीं, सड़कों पर दिखनी चाहिए। अगर जल्द ही कोचिंग संचालकों, अभिभावकों और नाबालिगों के इस ‘त्रिकोणीय गठजोड़’ पर कानूनी हथौड़ा नहीं चला, तो होने वाले किसी भी हादसे की पूरी जिम्मेदारी केवल और केवल जिला प्रशासन की होगी।
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