उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तीव्र हो गई है। समाजवादी पार्टी के पुराने सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल की ओर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 200 सीटें दिए जाने की मांग उठी है। यह घोषणा सपा के साथ गठबंधन को लेकर चल रहे नब्ज पर रखे गए दांव का हिस्सा मानी जा रही है।
रालोद के नेता रोहित अग्रवाल ने लोकसभा चुनाव 2024 के पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘‘एक्स’’ पर एक पोस्ट में यह बात कही। उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि सीट का सवाल प्रमुख नहीं है, बल्कि जो जहां से जीत सकता है वहीं से चुनाव लड़ेगा।
रोहित अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा: “हमें पूर्ण विश्वास है कि समाजवादी पार्टी गठबंधन धर्म का पालन करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सम्मानजनक रूप से 200 सीटें देगी। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक पार्टी है। इससे कम सीटें देना उसके गौरव और योगदान का अपमान होगा।”
यूपी चुनाव में क्या है कांग्रेस का मूड?
रालोद फिलहाल एनडीए का हिस्सा है, जो भाजपा के नेतृत्व में है। इस पोस्ट को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच रिश्तों पर संकेत माना जा रहा है, खासकर तब जब दोनों पार्टियां आगामी चुनाव में सहयोग की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं।
हमें पूर्ण विश्वास है कि समाजवादी पार्टी गठबंधन धर्म का पालन करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सम्मानजनक रूप से 200 सीटें देगी।
कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक पार्टी है—इससे कम सीटें देना उसके गौरव और योगदान का अपमान होगा।— Rohit Agarwal (@rohitagarwal850) April 23, 2026
वहीं कांग्रेस की यूपी इकाई की ओर से कई बार कहा गया है कि पार्टी पूरे प्रदेश की 403 सीटों पर चुनाव की तैयारी कर रही है। हाल ही में यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने वाराणसी जिले में कुछ विधानसभा सीटों का उल्लेख करते हुए संकेत दिए थे कि पार्टी अधिकांश सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी।
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि आगामी चुनावों में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन के मुद्दे पर अभी कई बार चर्चा और फेरबदल हो सकते हैं। रालोद की यह मांग इस संदर्भ में महत्वपूर्ण राजनीतिक पर्ची के रूप में देखी जा रही है, जिससे गठबंधन समीकरणों में बदलाव आ सकता है।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में यह स्पष्ट है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियां अपने-अपने गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर सक्रिय रणनीति बना रही हैं। समय के साथ इस विषय में और भी तथ्य सामने आएंगे, जो आगामी चुनाव के स्वरूप को निर्धारित करेंगे।

