बीजिंग: चीन ने अमेरिका द्वारा ईरान के एक जहाज को जब्त करने के बाद उठाए गए आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह जहाज दोहरे उपयोग वाले माल की ढुलाई कर रहा था, जबकि चीन ने इस आरोप को बिना किसी ठोस सबूत के आधारित बताया और इसे राजनीतिक बदनियत के तौर पर खारिज किया।
अमेरिका ने हाल ही में एक ईरानी जहाज को इंटरसेप्ट किया था, जिसके ऊपर यह संदेह था कि वह सैन्य और नागरिक दोनों तरह के उपयोग की वस्तुएं ले जा रहा था। इस घटना की जानकारी देते हुए अमेरिकी प्रशासन की ओर से कहा गया था कि यह जहाज मानवाधिकार उल्लंघनों और वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले सामान की तस्करी में शामिल हो सकता है।
हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस आरोप पर साफ तौर पर कहा कि चीन ने कभी भी किसी तरह की अवैध गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया है और इस जहाज को चीन का ‘उपहार’ बताना पूरी तरह से भ्रमित करने वाला और तथ्यात्मक गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन करता है और किसी भी परिस्थिति में बेबुनियाद आरोपों को स्वीकार नहीं करेगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह मामला गहरा विवाद का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना यूएस-चीन संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ावा देने वाली हो सकती है। कई विश्लेषकों ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक मसलों पर यहां से नई जटिलताएं जन्म ले सकती हैं।
चीन के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग की जरूरत है ताकि विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सके। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जहाज को चीन की ओर से ईरान को दिया गया ‘उपहार’ बताया था, जिसे चीन ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और तथ्यों की पुष्टि से ही सही समाधान निकल सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि दोनों पक्षों को आपसी संवाद के जरिए विवादों को कम करना चाहिए ताकि वैश्विक शांति और स्थिरता बनी रह सके।

