काउंटिंग केंद्रों पर तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था

Rashtrabaan

    23 अप्रैल को हुए मतदान के बाद, मध्य क्षेत्र के 11,000 से अधिक मतदान केंद्रों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) संबंधित काउंटिंग केंद्रों तक कड़ी सुरक्षा के बीच पहुंचाई गईं। चुनाव अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को पूरी सावधानी के साथ संपन्न कराकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की।

    सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक काउंटिंग केंद्र पर तैनात सुरक्षा बलों ने तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी। सबसे पहले मतदान केंद्र से EVM मशीनों को पैक करके विशेष सुरक्षा वाहनों में लगाया गया। फिर ये वाहन सशस्त्र पुलिस के काफिले की निगरानी में काउंटिंग केंद्र की ओर रवाना हुए। तीसरे स्तर पर, काउंटिंग केंद्र के अंदर ही मशीनों को लॉकडाउन क्षेत्र में रखा गया जहां सीमित पहुंच और लगातार निगरानी व्यवस्था मौजूद थी।

    चुनाव प्राधिकारी ने बताया कि इस सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य मशीनों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार के दखल या छेड़छाड़ को रोकना था। उन्होंने यह भी कहा कि मतदान और मतगणना के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी मानकों का पालन किया गया है।

    स्थानिक अधिकारीयों ने बताया कि मतदान केंद्रों से मशीनों की निकासी में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है। मतगणना के लिए आने वाली EVMs को ट्रांसपोर्ट करते समय GPS और सीसीटीवी कैमरों की सहायता से उनकी निगरानी की गई। इस तरह की कड़े सुरक्षा उपायों से निर्वाचन प्रक्रिया में मतदाताओं का विश्वास बढ़ा है और चुनावों की निष्पक्षता पर किसी भी तरह के सवाल उठने की गुंजाइश कम होती है।

    विशेषज्ञ भी इस तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा कर रहे हैं, जिनका मानना है कि यह चुनावों के दौरान तकनीकी सुरक्षा और मानव सुरक्षा का उत्तम मेल है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि भविष्य में भी इस तरह की कड़ी सुरक्षा को बनाए रखा जाना चाहिए ताकि लोकतंत्र मजबूत बने।

    कुल मिलाकर, 23 अप्रैल को हुए मतदान के बाद मध्य क्षेत्र में EVM मशीनों की सुरक्षा के लिए जो योजनाएं जारी की गईं, वे न केवल अच्छी तरह आयोजित रहीं, बल्कि चुनाव आयोग द्वारा दिए गए निर्देशों का तत्पर पालन भी दिखाया। इससे मतगणना प्रक्रिया को पारदर्शी और सफल बनाने में मदद मिली है।

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