वसई, 22 अप्रैल 2026: वसई पश्चिम के सन सिटी स्थित बद्रीनाथ मंदिर परिसर में बुधवार को भगवान बद्री विशाल की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन हुआ, जिसने यहाँ के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान की। यह आयोजन लगभग 35 वर्ष पुराने सपने को साकार करते हुए उत्तराखंड की संस्कृति एवं आस्था को महाराष्ट्र की धरती पर स्थापित करने का महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि जी महाराज ने दर्शन देकर भक्तों को अपनी दिव्य उपस्थिति से कृतार्थ किया। समारोह में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मीरा-भाईंदर के पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, महापौर राजीव पाटील, पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकूर समेत अनेक स्थानीय एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे जिन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण की गरिमा बढ़ाई।
उत्तरांचल मित्र मंडल वसई की साझा पहल से निर्मित इस मंदिर ने वर्षों की मेहनत, समाजसेवा और समर्पण की कहानी बयां की। मंदिर निर्माण में लगे स्वयंसेवकों ने तन-मन-धन से योगदान दिया, जिससे यह श्रद्धा का प्रतीक स्थल बन पाया। इस पूरे प्रयास में ‘हम’ की भावना ने सभी को जोड़ा और एक सशक्त टीम का निर्माण किया।
कार्यक्रम की शुरुआत काशी के आचार्य मंडल के मार्गदर्शन में मंडप पूजन और गणेश पूजन से हुई। आचार्य हरिश्चंद्र लखेड़ा एवं आचार्य ताराचंद करगेती के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार से मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा।
कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण आकर्षण के रूप में निकाली गई कलश यात्रा में महिलाएं पारंपरिक पोशाक में सिर पर कलश धारण कर उत्साह के साथ शामिल हुईं। “जय बद्री विशाल” के जयघोष से वसई नगर गूंज उठा, और ढोल-ताशों, भजन-कीर्तन एवं वेद मंत्रों ने पूरा वातावरण पवित्रता से भर दिया।
सायंकाल में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा ने अपनी मधुर आवाज़ में भजन प्रस्तुत किए, जिससे उपस्थित लोगों का मन आस्था और श्रद्धा से ओतप्रोत हो गया। इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष माधवानंद भट्ट, महासचिव महेश चंद्र नैलवाल, कोषाध्यक्ष कुंदन सिंह बिष्ट सहित सभी कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। इनके साथ-साथ गोपाल सिंह मेहरा, गोविंद पांडे, महेंद्र सिंह रावत, मनोहर सिंह रौथाण, महेंद्र सिंह धामी, मोहन सिंह राजपूत, नरेंद्र पाल नेगी, हयात सिंह राजपूत, शेखर उपाध्याय, गोपाल सिंह कार्की, होशियार सिंह दसोनी, चंद्रकांत शर्मा, गणेश भारद्वाज, लज्जावंती भट्ट, मीनाक्षी भट्ट, खिमानंद लखेड़ा, बसंती नैलवाल, नरेश नैलवाल समेत अनेक स्वंयसेवक एवं समाजसेवी सक्रिय थे।
पांच दिनों तक चले इस आयोजन में वसई-नालासोपारा-विरार और महाराष्ट्र के अनेकों भाग से आए नागरिकों एवं महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभाई। महिलाएं मंदिर निर्माण एवं सेवा कार्य में निरंतर लगी रहीं, जबकि युवाओं ने दिन-रात मेहनत कर इस धार्मिक उत्सव को सफल बनाया।
अध्यक्ष माधवानंद भट्ट और मंडल के वरिष्ठ सदस्य इस सफल आयोजन के बाद सभी कार्यकर्ताओं तथा श्रद्धालुओं का कृतज्ञता सहित धन्यवाद ज्ञापित किया। वसई में स्थापित यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, एकता एवं समर्पण का प्रतीक है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक दीपस्तंभ होगा। महाराष्ट्र में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को अब एक नई दिशा प्राप्त हुई है।

