गोवा सरकार ने 1 करोड़ वर्ग मीटर पर्यावरण-संवेदनशील भूमि को नो-डेवलपमेंट जोन के रूप में पुन: वर्गीकृत करने का निर्णय लिया

Rashtrabaan

    गोवा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य की संवेदनशील भूमि की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में आयोजित टाउन एंड कंट्री प्लानिंग बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उत्तर गोवा के चोप्डेम, अराम्बोल और मंडरेम में 15 लाख वर्ग मीटर भूमि को नो-डेवलपमेंट जोन घोषित किया जाएगा। यह क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है और वहां किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाएगी।

    इस फैसले का मकसद गोवा की प्राकृतिक सुंदरता को बनाये रखना और पर्यावरणीय असंतुलन से बचाव करना है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने लंबे समय से इस बात पर जोर दिया था कि इन इलाकों में विकास कार्यों पर नियंत्रण न होने से जैव विविधता को खतरा उत्पन्न हो रहा है। राज्य सरकार की इस पहल से न केवल वन्यजीवों और प्राकृतिक आवासों को संरक्षण मिलेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों को भी सतत विकास के मॉडल के तहत बेहतर जीवनयापन का अवसर मिलेगा।

    टाउन एंड कंट्री प्लानिंग बोर्ड ने अपने निर्णय में कहा कि 1 करोड़ वर्ग मीटर से अधिक पर्यावरण-संवेदनशील भूमि को पुनः वर्गीकृत कर नो-डेवलपमेंट क्षेत्र घोषित किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलेगा कि गोवा पर्यावरणीय संरक्षण के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा। बोर्ड की इस बैठक में सभी सदस्यों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और इसे राज्य की दीर्घकालिक भलाई के लिए आवश्यक बताया।

    सरकार ने स्थानीय निकायों और नागरिक समाज से अपील की है कि वे इस नीति का समर्थन करें और अवैध निर्माण, जंगल की कटाई या किसी भी तरह के पर्यावरणीय नुकसान से बचाव में सक्रिय भूमिका निभाएं। इसके अलावा, पर्यावरण हितैषियों और ग्रामीण विकास को संतुलित करने के लिए विभिन्न सलाहकार समितियाँ गठित की जाएंगी, जो इस क्षेत्र में सतत विकास योजनाओं को लागू करने में मदद करेंगी।

    इस पहल से उम्मीद है कि न केवल पर्यावरण संरक्षित होगा, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी नई दिशा मिलेगी, क्योंकि पर्यटक आज अधिक स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण में घूमने को प्राथमिकता देते हैं। गोवा सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना ही उनकी प्राथमिकता है। यह निर्णय राज्य के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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