बागेश्वर बाबा के बयान पर शिवाजी महाराज को लेकर नया विवाद: सीएम ने सिरे से खारिज किया, महाराष्ट्र में गूंजा विरोध

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    मुंबई। बागेश्वर बाबा के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए ताज़ा बयान ने राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में कड़ाके की बहस छेड़ दी है। शास्त्री ने दावा किया कि शिवाजी महाराज युद्धों से थककर समर्थ रामदास स्वामी के पास गए और राज्य का शासन संत को सौंपने का आग्रह किया। इस बयान ने महाराष्ट्र के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को संगीन बना दिया है।

    शास्त्री ने हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने की और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को समर्पित करने की सलाह दी, जिससे विवाद और भी गहरा गया। यह भाषण नागपुर में एक प्रमुख आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में दिया गया था, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया।

    वास्तविकता और इतिहास के प्रति गंभीर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों ने इस बयान की तीव्र आलोचना की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार और हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास के साथ खिलवाड़ बताया और शास्त्री की गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना है कि शिवाजी महाराज ने कभी भी अपने मुकुट को किसी और के हाथ नहीं सौंपा। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने इसे तथ्यों से भ्रमित करने वाला करार दिया।

    शिवसेना(उद्धव) के प्रवक्ता संजय राउत ने इसे महाराष्ट्र के इतिहास का अपमान बताया और आरोप लगाया कि महायुति सरकार ऐसे बयान देने वालों को प्रोत्साहित कर रही है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने बागेश्वर बाबा पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि यह राज्य और उसकी जनता के लिए गहरा नुकसान होगा यदि ऐसा नहीं किया गया। जयराष्ट्रवादी नेता जितेंद्र आव्हाड ने शास्त्री से माफी मांगने को कहा और 17वीं सदी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड प्रस्तुत किए जो शास्त्री के दावों का खंडन करते हैं।

    वहीं, महायुति गठबंधन फिलहाल विवाद को कम करने की कोशिश में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि शास्त्री का बयान ऐतिहासिक सच्चाई पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि विभिन्न लोककथाएं और भक्ति के रूप लोगों के बीच प्रचलित हैं, परंतु लिखा गया इतिहास ही प्रमुख प्रमाण माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू संस्कृति और परंपराओं को सक्रिय रखने वाले संगठन हैं और बाबा का मुख्य संदेश था कि हर परिवार में कम से कम एक सदस्य संघ से जुड़ा हो।

    इस विवाद ने शिवाजी महाराज के प्रतीक के रूप में उनकी छवि और इतिहास की पुनः व्याख्या को लेकर गहरी बहस छेड़ी है। महाराष्ट्र की जनता तथा राजनीतिक वर्ग इस मामले पर विनम्र और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील कर रहे हैं ताकि मराठी और हिंदू समुदाय की भावनाओं का सम्मान बना रहे।

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