बदायूं : उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। राधिका नर्सिंग होम नामक एक निजी संस्थान में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के कारण एक नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और मामले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
सरकारी अस्पताल से निजी नर्सिंग होम भेजने का आरोप
पीड़ित परिवार के अनुसार, छोटेलाल अपनी पत्नी कृष्णा को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचे थे। वहां मौजूद स्टाफ ने उन्हें बताया कि अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और बेहतर इलाज के लिए उन्हें बाहर जाना होगा। आरोप है कि एएनएम शशिलता और कर्मचारी बबिता ने चिकित्सा प्रभारी डॉ. अवधेश कुमार राठौर से बातचीत की, जिसके बाद प्रसूता को राधिका नर्सिंग होम भेज दिया गया। जांच में यह सामने आया कि जिस नर्सिंग होम में मरीज को रेफर किया गया, वह डॉ. राठौर की बहन का है और कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित हो रहा था। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
डराकर पैसे वसूलने का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि नर्सिंग होम पहुंचने के बाद स्टाफ ने पहले सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिया, लेकिन जल्द ही स्थिति को गंभीर बताकर परिवार को डराया गया। उनसे तुरंत 15 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा गया। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने इधर-उधर से पैसे जुटाकर रकम जमा की, क्योंकि उन्हें प्रसूता और बच्चे की जान की चिंता थी। यह आरोप भी लगाया गया कि पैसे न देने की स्थिति में उन्हें धमकाया गया, जिससे परिवार मानसिक दबाव में आ गया।
प्रसव के दौरान अमानवीय व्यवहार का आरोप
सबसे गंभीर आरोप प्रसव के दौरान हुए व्यवहार को लेकर है। छोटेलाल ने बताया कि डिलीवरी के समय एक महिला कर्मी ने प्रसूता के सीने पर बैठकर पेट पर दबाव डाला, ताकि प्रसव जल्दी हो सके। इस प्रक्रिया के दौरान प्रसूता दर्द से तड़पती रही, लेकिन स्टाफ ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। इस तरह की प्रक्रिया न केवल असुरक्षित मानी जाती है, बल्कि इससे मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। परिजनों का कहना है कि इसी लापरवाही और क्रूरता के कारण नवजात की गर्भ में ही मौत हो गई।
अप्रशिक्षित स्टाफ और अव्यवस्था का खुलासा
घटना के बाद जब परिजनों ने विरोध जताया, तो नर्सिंग होम में हंगामा हो गया। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच शुरू की। एसडीएम मोहित कुमार सिंह ने जब नर्सिंग होम का निरीक्षण किया, तो वहां कई अनियमितताएं सामने आईं। बताया गया कि नर्सिंग होम में प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की कमी थी और आवश्यक सुविधाएं भी मौजूद नहीं थीं। इससे साफ हुआ कि संस्थान बिना पर्याप्त मानकों के संचालित हो रहा था, जो मरीजों की जान के साथ जोखिम पैदा कर रहा था।
नर्सिंग होम सील, डॉक्टर का तबादला
जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राधिका नर्सिंग होम को सील कर दिया। साथ ही, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अवधेश कुमार राठौर का तबादला कर दिया गया है। हालांकि, इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कैसे एक सरकारी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए मरीजों को अवैध संस्थानों में भेज सकता है।

