तमिल नाडु में सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ती जागरूकता के बावजूद, छतों पर सौर पैनलों की स्थापना अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाई है। राज्य में 2.4 करोड़ से अधिक परिवार होते हुए भी छतों पर सौर पैनल लगवाने वाली संख्या अपेक्षाकृत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे बढ़ावा देने के लिए प्रभावी और मजबूत नीति का अभाव प्रमुख बाधा है।
अधिकतर सौर क्षमता जमीन पर स्थापित बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट्स से आती है, जो ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक को बड़ा स्तर पर कर रहे हैं। हालांकि, छत पर सौर प्रणाली न केवल ऊर्जा उत्पादन में विविधता लाती है बल्कि पारंपरिक ग्रिड पर भी दबाव कम करती है। इससे विद्युत वितरण की दक्षता बढ़ती है और उपभोक्ताओं को स्वच्छ ऊर्जा अनुकूल विकल्प मिलते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तमिल नाडु सरकार को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए उपभोक्ताओं को विशेष छूट, सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। इसके अलावा, छत पर सौर पैनल लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाना और जागरूकता अभियान तेज करना भी आवश्यक है। केवल तब ही बड़े स्तर पर घरेलू सौर ऊर्जा परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
राज्य में सौर शक्तिशाली प्रोजेक्ट्स के बावजूद, स्थानीय निवासियों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए समुचित उपकरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। अधिकतर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ऐसे प्रोजेक्ट्स की कमी या स्थापना के प्रति जागरूकता नहीं होना इसके पीछे मुख्य कारण है।
सौर ऊर्जा के प्रति सरकार और निजी क्षेत्र दोनों के संयुक्त प्रयास से ही तमिल नाडु सौर ऊर्जा क्रांति में अग्रणी बन सकता है। मजबूत नीति, वित्तीय सहायता और उपभोक्ताओं की भागीदारी से छत पर सौर ऊर्जा स्थापित करने के अभ्यास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य की हरित ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

