फिल्मी दुनिया के चमक-दमक के पीछे छुपा वह सच जिसे आमतौर पर देखने वालों की नजर नहीं जाती, उसे फोटोग्राफर केतकी सेठ ने अपनी तस्वीरों में बखूबी उकेरा है। उनका नवीनतम संग्रह ‘फ्लैशबैक’ मुंबई के फिल्म सिटी से लेकर दिल्ली की गैलरी तक, फिल्म निर्माण की जटिल प्रक्रिया की खास और अनदेखी तस्वीरें पेश करता है।
केतकी सेठ की कैमरा नजर में फिल्मी सितारों की चमक-धमक के साथ-साथ शूटिंग का असली माहौल भी कैद हुआ है। उदाहरण के तौर पर, एक तस्वीर में जानी-मानी अभिनेत्री रेखा को सोफे पर बैठे हुए दिखाया गया है। वे सोच में डूबी हुई हैं और दूर कहीं कुछ देख रही हैं। लेकिन जब नजर उनका ध्यान छोड़ती है, तो तस्वीर के अन्य हिस्से जैसे लाइटिंग उपकरण, ग्लास टेबल और पक्षियों के पिंजरे भी नजर आने लगते हैं। यह तस्वीर न केवल फिल्मी ग्लैमर को दिखाती है, बल्कि पर्दे के पीछे के असल वातावरण की झलक भी देती है।
इसी तरह, पूनम ढिल्लों की एक तस्वीर है, जिसमें वे एक शेवरले कार में मुस्कुरा रही हैं, उनके चेहरे पर घुमी हुई चोटी साफ दिखाई देती है। यह तस्वीर हिंदी फिल्म ‘कसम’ की शूटिंग के दौरान ली गई, जिसमें उनके पीछे फिल्म सिटी के टूटे-फूटे खंडहर दिखाई देते हैं, जिन्हें केतकी सेठ ने ‘चींटियों के टीले’ से तुलना की।
फिल्म निर्माण की इस हलचल में, केतकी सेठ ने सितारों, तकनीशियनों, और शौकिया कलाकारों के चेहरे और भावों को पकड़ा है। उनकी तस्वीरें केवल दृश्य रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि ये उस पल की घटनाओं और भावनाओं की कहानियाँ भी बयां करती हैं जब वे ली गई थीं।
‘फ्लैशबैक’ केवल एक पुस्तक का नाम नहीं, बल्कि दिल्ली में हाल ही में संपन्न एक प्रदर्शनी भी है, जिसे केतकी के गैलरिस्ट देविका दौलत-सिंह और फोटोइंक कंपनी ने आयोजित किया। पहले भी केतकी सेठ ने मुंबई, जुड़वां बच्चों, सिदी समुदाय और फोटो स्टूडियोज जैसे विषयों पर कई पुस्तकें प्रकाशित की हैं।
उनकी यह नई प्रस्तुति फिल्मी ग्लैमर के पीछे की सच्चाई को सामने लाकर फिल्म जगत के प्रति हमारी समझ को और समृद्ध करती है। यह शृंखला दर्शकों को याद दिलाती है कि कैमरे के सामने की चमक-दमक के पीछे कितनी मेहनत, संघर्ष और असल जिंदगी छुपी होती है, जो अक्सर छूट जाती है।

