गुजरात कैबिनेट ने बुधवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सेवा और सुशासन को लेकर कई अहम निर्णय लिए। इस दौरान वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन (VGRC) की तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई, जो 1 और 2 मई को सूरत में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जन शिकायतों की एक व्यापक सूची बनाएँ और उन्हें जल्द से जल्द हल करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री और सरकारी प्रवक्ता जीतू वघानी ने बताया कि राज्य सरकार ने जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देकर समाधान करने की नीति को मजबूती से अपनाया है। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक तंत्र को निर्देशित किया है कि वे ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक हर शिकायत का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें। यह कदम गुजरात में सेवा की गुणवत्ता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।
VGRC की तैयारियों पर हुई गहन चर्चा
सूरत में आयोजित होने वाले VGRC सम्मेलन पर भी मंत्रिमंडल ने विशेष ध्यान दिया। इस सम्मेलन के तहत मध्य और दक्षिण गुजरात के 16 जिलों की औद्योगिक क्षमता और संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल उद्घाटन भाषण देंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री हर्षभाई संघवी सेमिनार, पैनल चर्चा एवं राउंड टेबल बैठकें आयोजित करेंगे। यह आयोजन निवेश एवं आर्थिक विकास के नए अवसर खोलने में सहायक साबित होगा।
इसके अतिरिक्त, 1 से 5 मई तक समान स्थान पर एक क्षेत्रीय प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें MSME, स्टार्टअप तथा विभिन्न सरकारी विभाग अपने उत्पाद और सेवाएं प्रदर्शित करेंगे। इस प्रदर्शनी में जीआईएफटी सिटी के वैश्विक वित्तीय अवसरों को भी प्रमुखता दी जाएगी।
स्थानीय निकाय चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत का स्वागत
कैबिनेट ने हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की सफलता को सराहा और एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में इसे व्यापक विकास योजना तथा शासन की सफलता का परिणाम बताया गया। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि जैसी कई केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया गया। साथ ही ज्योति ग्राम और अन्य संरचनात्मक पहलों को भी इस सफलता का आधार बताया गया है।
प्रस्ताव में गुजरात को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलने के विषय पर भी चर्चा हुई। अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आय सीमा को संशोधित कर 3.6 लाख रुपये करने का निर्णय भी लिया गया। इसके अलावा डॉ. अंबेडकर विदेशी अध्ययन मानव गरिमा योजना और समरस छात्रावास जैसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।
राज्य सरकार की यह पहल सेवा और सुशासन के मंत्र के अनुरूप जनहित के मुद्दों को प्रभावी और त्वरित तरीके से सुलझाने के लिए प्रतिबद्धता दिखाती है। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

