दिल्ली उच्च न्यायालय ने संजय कपूर की संपत्तियों को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया है। यह आदेश कपूर परिवार के विरासत विवाद के चलते आया है, जिसमें संजय कपूर के बच्चों ने दूसरी पत्नी करिश्मा कपूर के साथ मिलकर तीसरी पत्नी प्रिया कपूर द्वारा दावा किए गए वसीयतनामे को चुनौती दी है।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब संजय कपूर की पहली पत्नी के बच्चे अपनी मां की दूसरी पत्नी करिश्मा कपूर की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की, जिसमें उन्होंने बताया कि संजय कपूर की असल संपत्ति को लेकर उनके खिलाफ धोखा दिया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रिया कपूर को सारा मुवावजा देने वाला वसीयतनामा गलत और अनुचित है।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान Kapoor परिवार के सदस्यों से विस्तृत ब्योरे मांगे हैं और उनके सभी दावों की समीक्षा कर रहा है। अदालत ने अपनी अंतरिम आदेश में सारे विवादित संपत्तियों को जमीनी स्तर पर जब्त कर दिया है, ताकि संपत्ति के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण को रोका जा सके।
विरासत विवाद में संजय कपूर की दूसरी पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चे यह दावा कर रहे हैं कि उनकी मां को भी उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने संजय के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूसरी ओर, प्रिया कपूर का कहना है कि जो वसीयतनामा है, वह पूरी तरह से वैध और पारदर्शी है, जिसकी पुष्टि संजय कपूर ने अपने अंतिम दिनों में की थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के विरासत विवाद अक्सर महीनों तक चलते हैं और अदालत को सभी पक्षों के दावे सुनने के बाद ही अंतिम फैसला देना संभव होता है। इस मामले में भी अदालत को पूर्ण प्रमाणिकता और सभी कानूनी पहलुओं पर गहराई से विचार करना होगा।
यह आदेश कपूर परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है और संभवतः भविष्य में विरासत संबंधी मामलों में नए मिसाल कायम कर सकता है। अभी तक न्यायालय ने अंतिम फैसला नहीं दिया है, और अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की गई है।

