पवन खेड़ा मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कांग्रेस ने किया स्वागत, कहा आज संविधान की विजय हुई

Rashtrabaan

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर लगे तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति होने के आरोप लगाने के बाद न्यायिक मामलों में फंसे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत प्रदान की है। इस फैसले पर कांग्रेस ने न्यायालय का आभार व्यक्त किया है और इसे संविधान की जीत बताया है।

    कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश तथा कानून एवं मानव अधिकार विभाग के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मीडिया से बातचीत की। जयराम रमेश ने कहा, “आज संविधान की जीत हुई है। मोदी सरकार प्रतिदिन संविधान पर हमला करती है, लेकिन आज संवैधानिक मूल्यों और प्रावधानों ने बाज़ी मार ली। हम सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णायक फैसले का हार्दिक स्वागत करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि संविधान पर हमले जारी रहेंगे, परंतु न्यायपालिका में विश्वास रखने वालों के लिए आज का फैसला एक सशक्त संदेश है कि संविधान के रक्षक जीवित हैं।

    इस मामले में प्रमुख पैरवी कर्ता वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वे यहाँ स्वयं की प्रशंसा के लिए नहीं बल्कि मूलभूत सिद्धांतों की रक्षा के लिए आए हैं। उन्होंने न्याय व्यवस्था को लोगों की संरक्षक बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता से जुड़ा कोई मुद्दा हो तो अदालत न्याय का दुपट्टा बनती है। सिंघवी ने कहा कि कानून के अधीन रहना हमारा कर्तव्य है तथा जब हम धर्म की रक्षा करते हैं तो धर्म भी हमारी सुरक्षा करता है।

    भारी संख्या में पुलिस पहुंचाना उत्पीड़न का हिस्सा

    अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पूरे मामले की शुरुआत कामरूप मजिस्ट्रेट कोर्ट से लेकर तेलंगाना हाई कोर्ट, गुवाहाटी हाई कोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा बताई। उन्होंने कहा कि मानहानि के मामलों में आमतौर पर पूछताछ गिरफ्तारी के बिना संभव हो सकती है, लेकिन इस मामले में करीब 60 पुलिसकर्मी एक व्यक्ति के घर पर पहुंचे। उन्होंने इसे डराने-धमकाने और राजनीतिक उत्पीड़न के रूप में वर्णित किया।

    असम के मुख्यमंत्री को बयानों पर खेद व्यक्त करना चाहिए

    सिंघवी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयानों का सख्ती से उल्लेख किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति को ऐसे विवादित बयान देने से बचना चाहिए और इस विषय पर गंभीरतापूर्वक सोच कर खेद प्रकट करना चाहिए।

    कांग्रेस ने असम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए

    सिंघवी ने बताया कि 5 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दो दिन में असम सरकार ने इस मामले में एक गैर-जमानती वारंट की याचिका दायर की थी जो कि निरस्त कर दी गई। उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोप सिद्ध हुए बिना किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले में शिकायतकर्ता, याचिकाकर्ता और जांच एजेंसी के दावे सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए गए हैं।

    सभी प्रावधान जमानती हैं: सिंघवी

    सिंघवी ने यह भी बताया कि मामले में दोषी सिद्धि से बचने के लिए कई प्रावधानों का गलत तरीके से उपयोग किया गया था, जिसे उन्होंने अदालत में जमानती बताते हुए सफलतापूर्वक साबित किया। उन्होंने जोर दिया कि सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है और राजनीतिक संदर्भ में किसी बयान को अधिक बढ़ाना अनुचित होगा तथा इससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) पर खतरा उठ सकता है।

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