रायपुर। सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। राज्य सूचना आयोग ने रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी पर भारी जुर्माना लगाया है और राशि वसूली के भी आदेश दिए हैं। इस निर्णय से अधिकारियों की जवाबदेही और सूचना उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रियाओं की महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
आयोग की जांच में पाया गया कि संबंधित अधिकारी ने सूचना का प्रोत्साहन करने के लिए निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया। कई मामलों में जानकारी अधूरी या भ्रामक थी, जिससे सूचना के अधिकार कानून की मूल भावना को ठेस पहुंची। इस गंभीर लापरवाही को दृष्टिगत रखते हुए आयोग ने पांच मामलों में कुल 1,17,500 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें चार मामलों पर 25-25 हजार और एक मामले पर 17,500 रुपये के जुर्माने के आदेश शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, आयोग ने एक मामले में आवेदक को 1,26,000 पन्नों की जानकारी मुफ्त में उपलब्ध कराने का आदेश भी दिया है। इस प्रक्रिया में उठने वाले करीब 2.56 लाख रुपये के खर्च को भी संबंधित अधिकारी से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं जो इस पूरे मामले की गंभीरता और अधिकारियों की जिम्मेदारी को दर्शाता है।
आयोग का कठोर फैसला यह बताता है कि अब सूचना अधिकारी सूचना देने में देरी या लापरवाही नहीं कर सकते। यह कार्रवाई सूचना के अधिकार कानून के पैरोकारों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
इस फैसले पर आरटीआई के लिए आवेदन करने वाले विकास तिवारी ने कहा कि यह जीत केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि आम जनता के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। आरटीआई कानून समाज के कमजोर वर्गों का सशक्त माध्यम है, जिससे स्कूल, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि कानून से कोई भी बड़ा नहीं है और यह फैसला हजारों छात्रों और अभिभावकों के हित में एक सकारात्मक संदेश देता है।
राज्य सूचना आयोग के इस कदम से यह भी स्पष्ट हो गया है कि सरकारी अधिकारियों को निर्धारित कानून और नियमों का पालन करना अनिवार्य है और यदि वे इस जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हैं तो सख्त कार्रवाई होगी। इससे भविष्य में सूचना उपलब्ध कराने के कार्य में सुधर होने की संभावना बढ़ गई है।

