धार जिले में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने को लेकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शुक्रवार को राज्यव्यापी आंदोलन के चलते सैकड़ों कांग्रेसियों ने इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैक्टर और अन्य वाहन खड़े कर यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया था, जिससे कई घंटों तक आवाजाही प्रभावित हुई और यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पुलिस ने शनिवार को कुल 26 कांग्रेस नेताओं सहित दर्जनों स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। प्रमुख नामों में गंधवानी से विधायक और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राजपुर के विधायक बाला बच्चन, कुक्षी के विधायक हनी बघेल, सरदारपुर के विधायक प्रताप ग्रेवाल, पूर्व मंत्री सचिन यादव, झूमा सोलंकी, केदार डावर, हीरालाल और मोंटू सोलंकी शामिल हैं। इसके अलावा जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी समेत कई अन्य पदाधिकारी और स्थानीय कार्यकर्ता भी आरोपी बनाए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक रास्ते को अवरुद्ध कर गैरकानूनी रूप से जमा होकर यातायात में बाधा पहुंचाई, जो भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध माना जाता है। घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग समेत अन्य तकनीकी सबूत इकट्ठे किए हैं, जिनकी मदद से अन्य प्रदर्शनकारियों की पहचान की जा रही है। जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई संभव है।
कार्यक्रम के दौरान उमंग सिंघार ने इस एफआईआर पर कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों की मांग करना अपराध नहीं है और उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। सिंघार ने कहा, “मेरा प्रदेश का किसान जिस हक के लिए आवाज उठाता है, उसे दबाने का प्रयास बीजेपी सरकार कर रही है। MSP, फसल बीमा, खाद, बीज और बिजली के अधिकारों के लिए आंदोलन करना किसी अपराध के दायरे में नहीं आता।”
इस विवादित एफआईआर के बाद धार जिले में राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर चोट मान रही है, जबकि प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है। आगामी दिनों में इस मामले में और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है, जो मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी रहेंगी।
कुल मिलाकर धार जिले में हुए इस आंदोलन और उसके बाद दर्ज एफआईआर ने राज्य की राजनीति में नए विवाद को जन्म दिया है। मामला न्यायालय और जांच एजेंसियों के समक्ष जाने के साथ ही राजनीतिक दल इस पर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। जनता और किसानों की प्रतिक्रिया भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

