लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजनीति की हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में जल्द ही विस्तार किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस मंत्रिमंडल विस्तार का ऐलान आने वाले दिनों में हो सकता है, जिसमें लगभग छह नए सदस्यों को मंत्री पद का अवसर दिया जाना है। यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत माना जा रहा है।
प्रदेश सरकार में वर्तमान में कुल 54 मंत्री कार्यरत हैं, जिनमें 21 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं। राज्य विधानसभा की कुल 403 सीटों को देखते हुए सरकार 60 मंत्री तक को नियुक्त कर सकती है, इसलिए छह नई सीटें खाली हैं, जिन्हें भरने की योजना बनाई जा रही है।
हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से हाल ही में हुई मुलाकात को इस मामले से जोड़ा जा रहा है। यह बैठक शाम 6:30 बजे हुई थी, जहां राजनीतिक रणनीतियों और कैबिनेट विस्तार पर चर्चा हो सकती है।
मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले संभावित व्यक्तियों की सूची में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सबसे प्रमुख नाम है। इसके अतिरिक्त चायल से विधायक पूजा पाल, ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे, तेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान, हरदोई के मल्लावां से विधायक आशीष सिंह आशु और विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया के नाम भी चर्चा में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विस्तार आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को संतुलित करने के उद्देश्य से किया जा सकता है। यह मंत्रिमंडल बदलाव प्रदेश सरकार की रणनीतिक मजबूती और जनसमर्थन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
इससे पहले, बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार में हुए कैबिनेट विस्तार और पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता संभालने के बाद उत्तर प्रदेश में भी इस प्रकार का राजनीतिक बदलाव अपेक्षित था। अब यह देखना बाकी है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार से प्रदेश की राजनीति में किस तरह का प्रभाव पड़ता है।
सरकार के इस फैसले से राजनीतिक पार्टी और कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जगी है, जबकि विपक्ष की ओर से भी इस पर नजर बनी हुई है। प्रदेश की जनता भी मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नई ऊर्जा व सकारात्मक बदलाव की आशा रख रही है।

